हजारीबाग ट्रिपल मर्डर मिस्ट्री: खाकी पर लगे गंभीर आरोप, बच्चों को खोजने के बदले मांगे पैसे, अब एसपी ने बिठाई जांच
हजारीबाग ट्रिपल मर्डर मिस्ट्री: खाकी पर लगे गंभीर आरोप, बच्चों को खोजने के बदले मांगे पैसे, अब एसपी ने बिठाई जांच
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परिजनों का आरोप दलाल से चलता है हजारीबाग मुफ्फसिल थाना।
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले से एक हृदय विदारक और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। दंदाहा नदी से तीन बच्चों के शव मिलने के बाद परिजनों ने पुलिस पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।परिजनों का आरोप दलाल से चलता है हजारीबाग मुफ्फसिल थाना। लड़की , बच्चे कों ढूढने के लिए अलग तरीके से बहाने बनाकर पैसे लिए गए । इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
पुलिस ने लिए 4500 रुपये और कहा- बच्चे अजमेर में हैं”
मृतका खुशी के भाई शाहिद अंसारी ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब बच्चे लापता हुए थे, तब पुलिस ने उनकी तलाश करने के नाम पर परिजनों से 4500 रुपये की वसूली की। शाहिद का दावा है कि पैसे लेने के बावजूद पुलिस उन्हें लगातार गुमराह करती रही। परिजनों को यह कहकर सांत्वना दी गई कि बच्चे सुरक्षित हैं और वे अजमेर शरीफ पहुंच गए हैं।
दलाल और यूट्यूबर का भी नाम आया सामने
इस मामले में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि एक कथित यूट्यूबर और एक दलाल ने बच्चों को सुरक्षित वापस लाने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की थी। पहले से ही परेशान परिवार इन मांगों और पुलिस के ढुलमुल रवैये के बीच पिसता रहा।
शव बरामदगी वाली जगह पर गहराया सस्पेंस
शाहिद अंसारी ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने बताया कि जिस दंदाहा नदी के स्थान से तीनों शव बरामद हुए हैं, वहां ग्रामीणों ने पहले भी सघन तलाशी अभियान चलाया था। उस समय वहां कुछ भी नहीं मिला था। ऐसे में अब अचानक उसी जगह से शवों का मिलना हत्या की ओर इशारा कर रहा है और संदेह पैदा कर रहा है कि क्या शवों को बाद में वहां लाकर फेंका गया?
एसपी ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता और पुलिस पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए हजारीबाग के एसपी अमन कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
जांच अधिकारी: एडीशनल एसपी अमित कुमार और एसडीपीओ अमित आनंद।
उद्देश्य: कातिल को पकड़ना और पुलिस पर लगे अवैध वसूली के आरोपों और जांच में लापरवाही की सच्चाई का पता लगाना।
















