जमशेदपुर में उमड़ा कबूतरबाजी का जुनून: 50 हजार के इनाम के लिए आसमान में दमखम दिखाएंगे परिंदे
जमशेदपुर में उमड़ा कबूतरबाजी का जुनून: 50 हजार के इनाम के लिए आसमान में दमखम दिखाएंगे परिंदे

By Niraj Tiwari
जमशेदपुर: लौहनगरी में आज परंपरा और शौक का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। शहर के ‘कबूतर बाज क्लब’ द्वारा आयोजित पारंपरिक कबूतरबाजी प्रतियोगिता ने स्थानीय लोगों और शौकीनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस प्रतियोगिता में न केवल जीत का जज्बा है, बल्कि अपनी विरासत को सहेजने की कोशिश भी नजर आ रही है।
30 से अधिक प्रतिभागी, आसमान में कड़ा मुकाबला
प्रतियोगिता में शहर भर से 30 से अधिक अनुभवी कबूतरबाजों ने हिस्सा लिया है। सुबह की पहली किरण के साथ ही प्रशिक्षित कबूतरों को खुले आसमान में आजाद किया गया। जीत का पैमाना बेहद सरल लेकिन चुनौतीपूर्ण है—**सहनशक्ति**। जो कबूतर सबसे अधिक समय तक आसमान में रहेगा, वही विजेता कहलाएगा।
पुरस्कार और नियम: शाम 7 बजे तक टिकने वाले को मिलेगा बम्पर इनाम
आयोजकों ने इस बार पुरस्कार राशि और नियमों को काफी दिलचस्प रखा है:
प्रथम पुरस्कार: 50,000 (शाम 7 बजे तक लगातार उड़ान भरने वाले कबूतर के लिए)।
द्वितीय पुरस्कार: शाम 6 बजे तक लौटने वाले कबूतर को दिया जाएगा।
तृतीय पुरस्कार: शाम 5 बजे तक उड़ान भरने वाले कबूतर के लिए तय किया गया है।
बादाम और खास डाइट पर रहते हैं ये ‘एथलीट’
प्रतियोगिता में शामिल कबूतर कोई साधारण पक्षी नहीं, बल्कि खास तौर पर प्रशिक्षित ‘एथलीट’ हैं। इनके मालिकों ने बताया कि इन कबूतरों की डाइट का विशेष ध्यान रखा जाता है। इन्हें धान, बादाम और अन्य पौष्टिक मेवे खिलाए जाते हैं, ताकि लंबी उड़ान के दौरान इनकी ऊर्जा बनी रहे।
> “यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा है। राजा-महाराजाओं के दौर में कबूतर संदेशवाहक हुआ करते थे, आज हम इस कला को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं।” आयोजक समिति
परंपरा और आधुनिकता का मेल
आज के दौर में जहां संचार के लिए स्मार्टफोन और हाई-स्पीड इंटरनेट का बोलबाला है, वहीं जमशेदपुर में कबूतरबाजी का यह शौक बताता है कि पुरानी परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में धड़क रही हैं। यह आयोजन शहर की सांस्कृतिक विविधता और पुराने शौक को नई पीढ़ी से रूबरू कराने का एक बेहतरीन जरिया साबित हो रहा है।
यह भी पढ़ें: स्वास्थ्य मंत्री पर अमर बाऊरी का तीखा हमला, पत्रकारों पर हमले को बताया लोकतंत्र पर चोट

















