Aditya sahu bjp

झारखंड ट्रेजरी घोटाला: ‘चारा घोटाले’ से भी बड़ी साजिश की आशंका, BJP ने उठाई CBI जांच की मांग

Share
Link copied

Aditya sahu bjp

रांची: झारखंड में करोड़ों रुपये के ट्रेजरी घोटाले (कोषागार घोटाला) ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक कड़ा पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। साहू ने दावा किया है कि यह घोटाला तत्कालीन संयुक्त बिहार के बहुचर्चित ‘पशुपालन घोटाले’ (चारा घोटाला) से भी बड़ा साबित हो सकता है।

“सिस्टम और सत्ता के संरक्षण में हुआ खेल”

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जिलों में ट्रेजरी से अवैध निकासी कोई मामूली चूक नहीं है। उन्होंने कहा, *”यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि इस अवैध निकासी में केवल छोटे कर्मचारी शामिल नहीं हैं, बल्कि ‘सिस्टम और सत्ता’ के संरक्षण में एक सुनियोजित नेक्सस (गठजोड़) काम कर रहा है।”

भाजपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब महालेखाकार (AG) ने सरकार को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के प्रति सचेत किया था, तो अब तक की कार्रवाई केवल ‘खानापूर्ति’ तक ही सीमित क्यों है?

ई-कुबेर पोर्टल में सेंधमारी पर उठाए सवाल

साहू ने इस घोटाले की तकनीकी खामियों पर प्रहार करते हुए सरकार से पूछा ..

1. सीमित जांच क्यों:

जब रांची, चाईबासा और पलामू जैसे जिलों में अवैध निकासी हुई, तो CID केवल बोकारो और हजारीबाग तक ही केंद्रित क्यों है?

2. DDO की भूमिका:

ई-कुबेर पोर्टल और मास्टर डेटाबेस में छेड़छाड़ होती रही, लेकिन आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDO) को इसकी भनक तक नहीं लगी। क्या यह संभव है?

3. ऑडिट की विफलता:

पिछले वर्षों में स्टेट लेवल पर कब-कब ऑडिट कराया गया? JAP-IT की इस पूरे मामले में क्या भूमिका रही है?

4. जांच की डेडलाइन:

अमिताभ कौशल कमेटी और SIT को रिपोर्ट सौंपने के लिए क्या कोई समय सीमा तय की गई है?

5. ट्रेजरी कोड का उल्लंघन:

नियमों के अनुसार उपायुक्तों (DC) को ट्रेजरी का निरीक्षण करना होता है। पिछले 6 सालों में कितने निरीक्षण हुए?

श्वेत पत्र जारी करे सरकार

भाजपा ने मांग की है कि सरकार को इस घोटाले पर एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी करना चाहिए। साहू ने कहा कि समाचार माध्यमों से 150 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ रुपये तक की अवैध निकासी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जनता को यह जानने का हक है कि उनके खून-पसीने की कमाई पर डाका डालने वाले असली चेहरे कौन हैं।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि हाल ही में राज्य के कई कोषागारों से अवैध तरीके से करोड़ों रुपये निकाले जाने का मामला सामने आया है। इसमें ई-कुबेर पोर्टल में तकनीकी हेरफेर की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब तक कुछ छोटे पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी हैं, लेकिन विपक्ष इसे ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बता रहा है और बड़े अधिकारियों व सफेदपोशों की संलिप्तता की आशंका जता रहा है।

 

ABOUT THE AUTHOR
Drishti Now Desk

Drishti Now Desk

Desk

Drishti Now एक स्वतंत्र हिंदी डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जिसकी प्राथमिक कवरेज झारखंड और बिहार से जुड़ी खबरों पर केंद्रित है। इसके साथ देश और दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर भी समाचार प्रकाशित किए जाते हैं। राजनीति, अपराध, समाज, धर्म, शिक्षा, खेल, प्रशासन, मौसम और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया जाता है। Drishti Now का उद्देश्य पाठकों तक महत्वपूर्ण समाचारों और घटनाक्रमों की स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार जानकारी पहुंचाना है। Drishti Now — नजर हर खबर पर।