India-UAE oil deal: Now the country's pace will not stop even in times of crisis!

भारत-UAE तेल समझौता: अब संकट में भी नहीं रुकेगी देश की रफ्तार!

India-UAE oil deal: Now the country's pace will not stop even in times of crisis!
India-UAE oil deal: Now the country’s pace will not stop even in times of crisis!

भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक समझौता हुआ है, जिसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के यूएई दौरे के दौरान इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और Abu Dhabi National Oil Company के बीच रणनीतिक सहयोग को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

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क्या है समझौता?

इस समझौते के तहत यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC भारत के भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में अपना कच्चा तेल स्टोर करेगी। कर्नाटक के पादुर और मंगलूरु जैसे भूमिगत भंडारण केंद्रों में तेल जमा किया जाएगा। खास बात यह है कि आपातकाल या संकट की स्थिति में भारत इस तेल का तुरंत इस्तेमाल कर सकेगा।

यानी तेल यूएई का होगा, भंडारण भारत में होगा और जरूरत पड़ने पर दोनों देशों को इसका लाभ मिलेगा। समझौते के तहत यूएई के फुजैराह में संभावित कच्चे तेल भंडारण को भी भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व का हिस्सा माना जाएगा।

3 करोड़ बैरल तक होगा भंडारण

विदेश सचिव Vikram Misri ने जानकारी दी कि इस समझौते के तहत यूएई भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल स्टोर करेगा। इससे भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत होगा।

भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में खाड़ी देशों में तनाव, युद्ध या समुद्री मार्ग बाधित होने की स्थिति में देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ईरान युद्ध जैसे हालात में यह खतरा पहले भी सामने आ चुका है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध या भू-राजनीतिक संकट होता है तो तेल सप्लाई रुक सकती है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे समय में रणनीतिक भंडार देश के लिए सुरक्षा कवच का काम करेंगे।

ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सहारा

सरकार का मानना है कि यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देगा। संकट की स्थिति में तेल की उपलब्धता सुनिश्चित होने से देश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी और अर्थव्यवस्था पर असर कम होगा। भारत और यूएई के बीच यह समझौता केवल व्यापारिक साझेदारी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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