धनबाद में अनोखी पहल: पहली माहवारी पर किशोरियों का दीप जलाकर और तिलक लगाकर हुआ सम्मान
धनबाद : मासिक धर्म से जुड़ी पुरानी रूढ़ियों और झिझक को तोड़ते हुए धनबाद के तोपचांची प्रखंड में एक बेहद सराहनीय पहल देखने को मिली। यहाँ आयोजित “बाहा-जोआक संस्कार” कार्यक्रम में पहली बार माहवारी प्राप्त करने वाली किशोरियों को न केवल समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया, बल्कि उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया गया।
क्या था खास?
इस कार्यक्रम में किशोरियों का स्वागत किसी सामान्य समारोह की तरह नहीं, बल्कि एक खास अनुष्ठान के साथ किया गया। मंच पर किशोरियों के माथे पर तिलक लगाया गया और उनके हाथों में दीप थमाए गए।
इस पहल का मुख्य संदेश स्पष्ट था: मासिक धर्म कोई शर्म या छिपानी वाली बात नहीं है, बल्कि यह जीवन का एक स्वाभाविक और गरिमामय हिस्सा है।
क्यों जरूरी है यह पहल?
आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ और सामाजिक बंदिशें मौजूद हैं। किशोरियों को अक्सर इस दौरान अलगाव का सामना करना पड़ता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज को यह बताने की कोशिश की गई कि:
मासिक धर्म को लेकर शर्मिंदगी छोड़नी होगी।
किशोरियों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वच्छता (Hygiene) के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
सैनिटरी पैड और मेंस्ट्रुअल कप जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाना हर किशोरी का अधिकार है।
फिल्म ‘पैडमैन’ की भावना को धरातल पर उतारा
जिस तरह बॉलीवुड फिल्म ‘पैडमैन’ ने मासिक धर्म स्वच्छता पर देश भर में बहस छेड़ी थी, धनबाद की यह पहल उसी विचार को हकीकत में बदल रही है। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक मथुरा प्रसाद महतो और समाज कल्याण पदाधिकारी स्नेहा कश्यप भी शामिल हुए। उन्होंने किशोरियों को न केवल स्वास्थ्य और पोषण की जानकारी दी, बल्कि स्कूलों और कार्यस्थलों पर स्वच्छ शौचालय व साफ पानी की उपलब्धता पर भी जोर दिया।
बदलाव की नई उम्मीद
सार्वजनिक रूप से किशोरियों का मान-सम्मान बढ़ाने से न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि माता-पिता और पूरे समुदाय में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। यह अनुष्ठान इस बात का प्रतीक है कि जब समाज पुरानी गलत धारणाओं को त्यागकर नई सोच अपनाता है, तो बदलाव की राह आसान हो जाती है।

















