रांची-गुमला सीमा पर झांगुर ग्रुप के सरगना रामदेव उरांव समेत तीन अपराधियों ने किया आत्मसमर्पण, हथियार बरामद

रांची : झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर संगठित अपराधी गिरोह “झांगुर ग्रुप” के प्रमुख एवं पांच लाख रुपये के इनामी कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव समेत तीन सक्रिय सदस्यों ने रांची और गुमला पुलिस की संयुक्त टीम के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उनके पास से दो स्वचालित हथियार, मैगजीन और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।
जानकारी के अनुसार, वरीय पुलिस अधीक्षक रांची को गुप्त सूचना मिली थी कि झांगुर ग्रुप का प्रमुख रामदेव उरांव और उसके संगठन के सदस्य रांची-गुमला सीमा क्षेत्र में घूम रहे हैं तथा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने की कोशिश कर रहे हैं। सूचना के सत्यापन और कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण रांची के निर्देशन में पुलिस उपाधीक्षक बेड़ो दीपक कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
इसी दौरान गुमला पुलिस को भी समान सूचना प्राप्त हुई, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक गुमला के निर्देश पर घाघरा थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह, पुअनि विकास कुमार और सशस्त्र बलों की टीम को सीमा क्षेत्र में भेजा गया। दोनों जिलों की संयुक्त पुलिस टीम जब रांची-गुमला सीमा पर पहुंची तो तीनों अपराधियों ने स्वयं को झांगुर ग्रुप का सदस्य बताते हुए झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रेरित होकर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जाहिर की और विधिवत आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाला रामदेव उरांव झांगुर ग्रुप का प्रमुख है और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ विभिन्न जिलों में लगभग 29 आपराधिक मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण करने वाले अपराधियों के नाम रामदेव उरांव, प्रसाद उरांव और सुबास उरांव शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से एक स्वचालित हथियार, 30 जिंदा कारतूस, 01 मैगजीन, एक स्वचालित .315 रायफल, 15 जिंदा कारतूस और 01 मैगजीन बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले अपराधियों के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस कार्रवाई को राज्य में अपराध नियंत्रण और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

















