There will be no shortage of anti-rabies vaccines in Jharkhand; government hospitals have been directed to maintain a three-month buffer stock.

झारखंड में एंटी-रैबीज वैक्सीन की नहीं होगी कमी, सरकारी अस्पतालों को 3 महीने का बफर स्टॉक रखने का निर्देश

There will be no shortage of anti-rabies vaccines in Jharkhand; government hospitals have been directed to maintain a three-month buffer stock.
There will be no shortage of anti-rabies vaccines in Jharkhand; government hospitals have been directed to maintain a three-month buffer stock.

रांची: झारखंड के सरकारी अस्पतालों में कुत्ते या अन्य जानवरों के काटने के बाद लगाई जाने वाली एंटी-रैबीज वैक्सीन (एआरवी) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने अहम कदम उठाया है। अब राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में एआरवी की कमी नहीं होने देने के लिए जिलों को कम से कम तीन महीने का बफर स्टॉक बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।

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एनएचएम ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देशित किया है कि अस्पतालों की मासिक खपत का आकलन कर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध रखें। साथ ही, जैसे ही स्टॉक कम होने लगे, नई खरीद की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े।

इस संबंध में एनएचएम के आरसीएच कॉन्फ्रेंस हॉल में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने की। उन्होंने कहा कि राज्य में रैबीज से होने वाली मौतों को रोकने के लिए दवाओं की निर्बाध उपलब्धता के साथ-साथ सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। बैठक में भारत सरकार के राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

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बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अलावा पशुपालन, नगर निगम, वन विभाग और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने भी भाग लिया। इस दौरान रैबीज की रोकथाम के लिए आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, उनके लिए शेल्टर होम विकसित करने और बेहतर देखभाल की व्यवस्था जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि केवल इलाज की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि बीमारी के स्रोत पर नियंत्रण भी उतना ही आवश्यक है।

बैठक में राज्य रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार सिंह, आईईसी सेल के डॉ. राहुल किशोर सिंह, रांची नगर निगम के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निशांत कुमार सिंह और डॉ. नैना कुमारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा पशुपालन विभाग, रिम्स, वन विभाग और अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी रैबीज नियंत्रण को लेकर अपने सुझाव दिए।

एनएचएम का मानना है कि समय पर वैक्सीन की उपलब्धता, विभागों के बीच समन्वित प्रयास और आवारा कुत्तों के प्रभावी प्रबंधन से झारखंड को रैबीज मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की जा सकती है।

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