High court jharkhand

67 पदों की जगह सिर्फ 23 नियुक्तियां: झारखंड हाईकोर्ट ने होमगार्ड अभ्यर्थियों की अपील की खारिज

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रांची:झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वर्ष 2008 की होमगार्ड भर्ती से जुड़े मामले में नौ अभ्यर्थियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने LPA No. 46 of 2025 को खारिज करते हुए कहा कि केवल चयनित होने से नियुक्ति का अविच्छेद्य (Indefeasible) अधिकार नहीं मिल जाता, विशेषकर जब उस समय रिक्त पद उपलब्ध ही नहीं थे।

क्या था मामला

अपीलकर्ताओं का दावा था कि वर्ष 2008 में विज्ञापन संख्या 01/2008 के तहत 67 होमगार्ड पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। उन्होंने चयन प्रक्रिया में भाग लिया और चयनित भी हुए, लेकिन केवल 23 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए भेजकर नियुक्ति दी गई। उनका आरोप था कि शेष चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं देना मनमाना और असंवैधानिक था।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2009 में दायर अपनी रिट याचिका वापस इसलिए ली थी क्योंकि उन्हें भविष्य की रिक्तियों में समायोजित करने का आश्वासन दिया गया था। बाद में वर्ष 2023 की नई भर्ती और 2025 की सूचना में उन्हें समायोजित नहीं किया गया।

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राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2008 के विज्ञापन में 67 पद दर्शाना एक त्रुटि थी, जबकि वास्तविक रिक्तियां केवल 23थीं। इन्हीं 23 पदों पर मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देकर वर्ष 2009 में नियुक्ति दे दी गई थी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में नियुक्ति देने का कोई आश्वासन नहीं दिया गया था। साथ ही वर्ष 2023 की नई भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें अपीलकर्ताओं ने भाग भी नहीं लिया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

खंडपीठ ने कहा कि यदि अपीलकर्ताओं को वास्तव में भविष्य में नियुक्ति का कोई आश्वासन दिया गया था तो उसका रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा कोई आदेश या दस्तावेज पेश नहीं किया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि 2008-09 की चयन प्रक्रिया के आधार पर लगभग 15 वर्ष बाद निकली रिक्तियों पर नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा किया जाए तो इस बीच पात्र हुए अन्य उम्मीदवारों के समान अवसर के अधिकार (अनुच्छेद 16) का उल्लंघन होगा।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रतीक्षा सूची की तरह पुरानी चयन सूची भी अनिश्चित काल तक नियुक्ति का आधार नहीं बन सकती। केवल चयन हो जाने से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता, खासकर तब जब संबंधित समय पर रिक्त पद उपलब्ध न हों।

अपील खारिज

हाईकोर्ट ने पाया कि एकलपीठ के आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है। इसी आधार पर LPA No. 46 of 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही I.A. No. 10167 of 2025 का भी निस्तारण कर दिया गया।

 

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