केलाघाघ जलाशय ने बदली जनजातीय परिवारों की तस्वीर, जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन पालन से सालाना ₹3 लाख तक की आय

शंभू कुमार सिंह
सिमडेगा: सिमडेगा जिले का केलाघाघ जलाशय आज जनजातीय परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक बन गया है। जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग की पहल पर शुरू की गई जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन (झींगा) पालन परियोजना ने सैकड़ों ग्रामीणों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार की परिकल्पना को साकार करते हुए वर्ष 2022-23 में केलाघाघ जलाशय में पायलट परियोजना के रूप में इसकी शुरुआत की गई थी। वर्तमान में मत्स्यजीवी सहयोग समिति के लगभग 300 सदस्य इस परियोजना से जुड़े हैं, जिनमें से 20 से 30 सक्रिय सदस्य प्रतिदिन 1.5 से 2 किलोग्राम जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन का उत्पादन और विपणन कर रहे हैं।
बाजार में इस प्रॉन की कीमत ₹600 से ₹1000 प्रति किलोग्राम तक मिल रही है, जिससे प्रत्येक सक्रिय सदस्य को सालाना ₹2 से ₹3 लाख तक की अतिरिक्त आय हो रही है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण पर खर्च बढ़ा है।

मत्स्य विभाग द्वारा नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग ने इस परियोजना को सफल एवं टिकाऊ आजीविका मॉडल के रूप में स्थापित किया है। जिला मत्स्य पदाधिकारी के नेतृत्व में समिति के सदस्यों ने आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
केलाघाघ के जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन की मांग अब सिमडेगा से बाहर भी बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और प्रचार-प्रसार के बाद रांची, धनबाद और ओडिशा के सुंदरगढ़ व बिरमित्रपुर सहित कई क्षेत्रों से खरीदार सीधे केलाघाघ पहुंच रहे हैं।
स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और सामुदायिक भागीदारी का यह मॉडल न केवल जनजातीय परिवारों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रहा है।
















