Prashant Kishor toppled the BJP's 31-year-old stronghold in Bankipur.

31 राउंड तक नहीं टूटी बढ़त, बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने ढहाया भाजपा का 31 साल पुराना किला

Prashant Kishor toppled the BJP's 31-year-old stronghold in Bankipur.

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पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज करते हुए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत हासिल की है। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि 31 राउंड की मतगणना के दौरान भाजपा उम्मीदवार एक भी बार बढ़त नहीं बना सके। शुरुआत से अंत तक प्रशांत किशोर बढ़त पर रहे और आखिरकार भाजपा के लंबे समय से कायम राजनीतिक वर्चस्व को खत्म कर दिया।

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बांकीपुर विधानसभा सीट को भाजपा का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था। पिछले करीब तीन दशक से इस सीट पर भाजपा और सिन्हा परिवार का दबदबा रहा। ऐसे में इस उपचुनाव का परिणाम सिर्फ एक सीट का नतीजा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलते जनादेश का संकेत माना जा रहा है।

भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका

बांकीपुर में मिली हार भाजपा के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। जिस सीट पर पार्टी लगातार जीत दर्ज करती रही, वहां इस बार मतदाताओं ने नया विकल्प चुना। पूरे मतगणना के दौरान भाजपा उम्मीदवार कभी भी बढ़त हासिल नहीं कर सके, जिससे साफ संकेत मिला कि इस बार मतदाताओं का रुझान निर्णायक रूप से जन सुराज के पक्ष में रहा।

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प्रशांत किशोर के लिए क्यों थी यह जीत अहम?

यह चुनाव प्रशांत किशोर के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा था। चुनावी रणनीतिकार के रूप में कई दलों को जीत दिलाने वाले प्रशांत किशोर पहली बार अपनी पार्टी के नेतृत्व में जनता के बीच जनादेश मांग रहे थे। यदि इस सीट पर हार मिलती तो जन सुराज की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठते, लेकिन जीत ने पार्टी को नई पहचान और मजबूती दी है।

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जन सुराज को मिला बड़ा राजनीतिक आधार

बांकीपुर की जीत से जन सुराज ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सिर्फ एक नई पार्टी नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने की क्षमता रखती है। इस नतीजे के बाद पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में और अधिक आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतर सकती है।

बिहार की राजनीति में नए समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव का असर आने वाले विधानसभा चुनावों तक दिखाई दे सकता है। अब तक मुकाबला मुख्य रूप से एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जाता था, लेकिन इस जीत के बाद जन सुराज ने खुद को तीसरे मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने का दावा मजबूत कर दिया है। ऐसे में आने वाले चुनावों में बिहार की राजनीति पहले से अधिक दिलचस्प होने की संभावना है।

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