पूर्व मुख्य सचिव के गोपनीय कार्यालय में कार्यरत रह चुका धर्मेंद्र CID की हिरासत में,आधिकारिक पुष्टि नही
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित मेधा घोटाले और अनियमितताओं की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बुधवार को धर्मेंद्र नामक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते के गोपनीय आवासीय कार्यालय में लंबे समय तक कार्यरत रह चुका है। जांच एजेंसी उसकी भूमिका और संभावित संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही है।
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इससे पहले मंगलवार को CID ने तीन अन्य कथित बिचौलियों—उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार—को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया है कि ये लोग परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TSDPL) से जुड़े कुछ लोगों के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को परीक्षा में लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर ‘सेटिंग’ का नेटवर्क चला रहे थे। इन गिरफ्तारियों के बाद इस मामले में हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 15 तक पहुंचने की चर्चा है, हालांकि CID ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है।

ओएमआर टेंपरिंग और पैसों के नेटवर्क पर फोकस
CID ने अदालत से रिमांड पर मिले तीन प्रमुख आरोपियों—कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी और प्रोग्रामर मोहम्मद उस्मान—से लगातार पूछताछ की। जांच अधिकारियों का मुख्य फोकस ओएमआर शीट में कथित छेड़छाड़, परीक्षा परिणाम प्रभावित करने की साजिश और अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम के पूरे नेटवर्क को समझना है।

जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कथित रूप से वसूली गई राशि किन-किन लोगों तक पहुंची और इस पूरे सिंडिकेट में किसकी क्या भूमिका रही। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और जब्त दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।





















