Dharmendra Paswan's journey to becoming a close associate of officials is under scrutiny.

JPSC परीक्षा घोटाला: साधारण कंप्यूटर ऑपरेटर से अफसरों के करीबी तक धर्मेंद्र पासवान का सफर जांच के घेरे में

Dharmendra Paswan's journey to becoming a close associate of officials is under scrutiny.

रांची: 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान गिरफ्तार कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार पासवान की भूमिका अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, धर्मेंद्र लंबे समय तक राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों के आवासीय कार्यालयों से जुड़े कामकाज से संबंधित रहा। जांच के बीच उसके पुराने संपर्कों और सरकारी तंत्र में उसकी पहुंच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

बताया जाता है कि धर्मेंद्र के पिता पूर्व मुख्य सचिव पीपी शर्मा के आवास पर कुक के रूप में काम करते थे। इसी दौरान धर्मेंद्र की सरकारी तंत्र में एंट्री हुई और बाद में उसकी नियुक्ति कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर हुई। इसके बाद धीरे-धीरे वह वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अपनी पहचान बनाने में सफल रहा।

RKDF
advertisement

धर्मेंद्र ने पूर्व मुख्य सचिव आरएस शर्मा, राजीव गौबा, राजबाला वर्मा और सुखदेव सिंह के कार्यकाल में आवासीय कार्यालय से जुड़े काम किए। अलग-अलग अधिकारियों के कार्यकाल में उसकी भूमिका और प्रभाव में अंतर जरूर रहा, लेकिन इस दौरान सरकारी व्यवस्था के भीतर उसके संपर्कों का दायरा बढ़ता गया।

अधिकारियों से करीबी ने बढ़ाया प्रभाव

सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहने के कारण धर्मेंद्र के पास सरकारी कामकाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां रहती थीं। आरोप है कि वह इन जानकारियों और अपने संपर्कों का इस्तेमाल प्रभाव बनाने के लिए करता था। कुछ अधिकारियों के बीच उसकी कार्यशैली और प्रभाव को लेकर चर्चाएं भी होती रही हैं।

जांच के दायरे में आने के बाद अब यह सवाल अहम हो गया है कि एक कंप्यूटर ऑपरेटर की पहुंच सरकारी व्यवस्था में आखिर किस स्तर तक थी और क्या उसकी भूमिका केवल तकनीकी काम तक सीमित थी या वह अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी हस्तक्षेप करता था।

Kashmir vastaralay
Advertisment

  JPSC से जुड़े मामले में गिरफ्तारी

JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान CID ने धर्मेंद्र कुमार पासवान को गिरफ्तार किया है। उसके पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब उसके मोबाइल फोन, संपर्कों और परीक्षा से जुड़े लोगों के साथ उसके संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है।

धर्मेंद्र पर लगे आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे और उनकी भूमिकाएं क्या थीं।

सरकारी सिस्टम में कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका पर भी सवाल

धर्मेंद्र प्रकरण ने सरकारी विभागों में कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका और उनके प्रभाव को लेकर भी बहस छेड़ दी है। कई विभागों में कंप्यूटर ऑपरेटर अधिकारियों के बेहद करीब रहकर फाइलों, पत्राचार और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े तकनीकी काम संभालते हैं।

ऐसे में यदि किसी कर्मचारी के पास लंबे समय तक संवेदनशील सूचनाओं और दस्तावेजों तक पहुंच बनी रहे, तो उसके अधिकार और जिम्मेदारियों की स्पष्ट निगरानी जरूरी हो जाती है। JPSC प्रकरण में सामने आए आरोपों के बाद अब यह भी जांच का विषय है कि परीक्षा से संबंधित सूचनाओं और दस्तावेजों तक किन लोगों की पहुंच थी।

धर्मेंद्र कुमार पासवान का मामला केवल एक व्यक्ति की कथित भूमिका तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, इसका जवाब CID की जांच और आगे सामने आने वाले तथ्यों से ही मिलेगा।

ABOUT THE AUTHOR
Drishti Now

Drishti Now

वरिष्ठ संवाददाता

झारखंड की राजनीति, प्रशासन और स्थानीय खबरों पर लंबे समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।