धनबाद : 160 करोड़ का निवेश, 200 से ज्यादा संपत्तियां और 1.02 करोड़ कैश… ED की जांच में अब आरती सिंह से जुड़े सवाल अहम
धनबाद/रांची। धनबाद के चर्चित कोयला कारोबारी एलबी सिंह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच अब परिवार की संपत्ति और निवेश तक पहुंच गई है। जुलाई में हुई छापेमारी के दौरान मिले करोड़ों रुपये के निवेश, नकदी और बड़ी संख्या में संपत्ति दस्तावेजों के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एलबी सिंह की पत्नी आरती सिंह से पूछताछ की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पूछताछ में सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों और निवेश में इस्तेमाल रकम का स्रोत क्या है। आरती सिंह की ओर से कथित तौर पर जवाब दिया गया कि वित्तीय मामलों की विस्तृत जानकारी उनके पति एलबी सिंह के पास रहती है। उन्होंने अपने स्तर पर कारोबार और निवेश से जुड़े कई सवालों की जानकारी होने से इनकार किया।
अब ईडी के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि संपत्ति किसके नाम है, बल्कि यह भी है कि उस संपत्ति को खरीदने के लिए पैसा कहां से आया।

160 करोड़ के निवेश ने बढ़ाई जांच की दिलचस्पी
जुलाई में एलबी सिंह और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर हुई कार्रवाई में ईडी ने करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज किया था। इसके साथ करीब 1.02 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जाने की बात एजेंसी ने कही थी।
जांच में 200 से अधिक अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और जानकारी भी सामने आई। डिजिटल उपकरणों और दूसरे वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
यही वजह है कि ईडी अब निवेश और संपत्तियों के रिकॉर्ड को कारोबार से होने वाली आय तथा अन्य वित्तीय लेन-देन से जोड़कर देख रही है।
आरती सिंह के नाम पर निवेश क्यों?
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि बरामद दस्तावेजों में परिवार की महिलाओं और अन्य सदस्यों के नाम पर मौजूद निवेश व संपत्तियों की जानकारी भी एजेंसी को मिली है।
ऐसे में ईडी यह जानना चाहती है कि संबंधित निवेश किस रकम से किए गए, रकम किस खाते से आई और निवेश संबंधी फैसले कौन लेता था।
आरती सिंह ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि परिवार के वित्तीय मामलों को उनके पति देखते हैं। उन्होंने अपनी ओर से किसी अवैध कारोबार में शामिल होने से इनकार किया और परिवार की संपत्ति को कोयला कारोबार से होने वाली आय से जोड़ा।
अब इन जवाबों का मिलान ईडी के पास मौजूद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से किया जा रहा है।

200 से ज्यादा संपत्तियों की कहानी क्या है?
ईडी की कार्रवाई में सामने आए 200 से अधिक अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इन संपत्तियों की खरीद कब हुई, किसके नाम पर हुई, भुगतान किस माध्यम से किया गया और रकम का स्रोत क्या था।
अगर किसी संपत्ति की खरीद और संबंधित वित्तीय लेन-देन के बीच ऐसा लिंक मिलता है जिसे एजेंसी अपराध से हुई आय से जोड़ती है, तो वह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के नाम पर संपत्ति या निवेश होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
1.02 करोड़ रुपये नकद पर भी जांच
छापेमारी के दौरान मिली करीब 1.02 करोड़ रुपये की नकदी भी जांच के दायरे में है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि यह रकम किसकी थी, कहां से आई और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए होना था।
इसी तरह डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों से मिलने वाली जानकारी को बैंक खातों और संपत्ति रिकॉर्ड से मिलाया जा रहा है।
दो समन के बाद तीसरी बार में पहुंचीं आरती
आरती सिंह को पूछताछ के लिए पहले भी ईडी की ओर से समन भेजे गए थे। पहले समन पर उन्होंने अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद दोबारा पेशी के लिए कहा गया, लेकिन वह उस समय भी ईडी कार्यालय नहीं पहुंचीं।
इसके बाद तीसरे समन पर वह रांची स्थित ईडी कार्यालय पहुंचीं और अधिकारियों के सवालों का सामना किया।
अब आगे क्या?
आरती सिंह से पूछताछ के बाद मामला खत्म होता नहीं दिख रहा है। यदि दस्तावेजों की जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो ईडी उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुला सकती है।
साथ ही परिवार, कारोबारी सहयोगियों और उन लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है जिनके नाम संपत्ति, निवेश या वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आए हैं।

















