महिला किसान खुशहाली योजना से बदलेगी महिलाओं की तस्वीर, 1,680 किसानों को मिलेगा लाभ : शिल्पी नेहा तिर्की

रांची: महिला किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी आय में स्थायी वृद्धि के उद्देश्य से गुरुवार को रांची के होटल रेडिशन ब्लू में ‘महिला किसान खुशहाली योजना–2026-27’ को लेकर राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में विभागीय अधिकारियों, जेएसएलपीएस, कृषि एवं ग्रामीण विकास संस्थाओं, तकनीकी एवं शोध संस्थानों, विशेषज्ञों, प्रगतिशील महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कार्यशाला को संबोधित करते हुए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ झारखंड की महिला किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। सरकार का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिला किसानों को समेकित और टिकाऊ कृषि प्रणाली से जोड़कर उनकी आय में स्थायी वृद्धि करना है।
मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। झारखंड में बड़ी संख्या में किसान अभी भी एक प्रमुख फसल पर निर्भर हैं। ऐसे में मौसम की मार पड़ने पर उनकी पूरी आय प्रभावित हो जाती है। इससे निपटने के लिए समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) को बढ़ावा देना जरूरी है। इस मॉडल में फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्यपालन, कुक्कुट पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों को जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो सकें।
योजना के तहत महिला किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को समेकित कृषि मॉडल विकसित करने के लिए सहायता देने का प्रस्ताव है। चयनित महिला किसान को लगभग 7 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान प्रस्तावित है।
सरकार ने अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लगभग 1,680 महिला किसानों के सफल और टिकाऊ समेकित कृषि मॉडल विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

मंत्री ने कहा कि योजना में आदिवासी, पिछड़े और वंचित वर्गों की महिला किसानों को विशेष प्राथमिकता देने पर ध्यान दिया जाएगा। लाभुकों का चयन पारदर्शी, समावेशी और जरूरत आधारित रखने की बात कही गई है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंच सके।
कार्यशाला में योजना के मसौदा दिशा-निर्देश, लाभार्थियों की पात्रता एवं चयन प्रक्रिया, वित्तीय सहायता, फंड प्रवाह, जिला स्तर पर क्रियान्वयन, निगरानी व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि मॉडल विकसित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर योजना के डिजाइन और क्रियान्वयन ढांचे को और प्रभावी बनाया जाएगा।

कार्यशाला में कृषि विभाग के विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी, जेएसएलपीएस की सीईओ अनन्या मित्तल, कृषि निदेशक विद्यानंद पंकज, पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो, उद्यान निदेशक प्रवीण केरकेट्टा, निदेशक भूमसंरक्षण विकास कुमार समेत विभाग के वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, ICAR संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्र, ATMA, NABARD, NCDC, JSLPS, महिला स्वयं सहायता समूहों और विकास एवं नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
















