A businessman was jailed for 57 days after mistaking spices for drugs; the High Court granted him justice after 16 years.

दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति मांग को हाईकोर्ट का इनकार: संथाली परंपरा भी सरकारी नियम के सामने काम नहीं आयी

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहली पत्नी के रहते बिना विभागीय पूर्व अनुमति के की गई दूसरी शादी के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का दावा नहीं किया जा सकता—भले ही कर्मचारी का व्यक्तिगत या जनजातीय रीति-रिवाज (Customary Law) दूसरी शादी की अनुमति देता हो।

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यह निर्णय केवल एक कानूनी आदेश नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में प्रचलित सामाजिक परंपराओं, जनजातीय अधिकारों और आधुनिक प्रशासनिक सेवा नियमों के बीच जारी द्वंद्व को रेखांकित करता है।

क्या है पूरा मामला?

साहिबगंज जिले के बोारियो निवासी स्वर्गीय बरनवास माल्टू, जो पंचायत सेवक के पद पर कार्यरत थे, का निधन वर्ष 2011 में सेवाकाल के दौरान हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद उनकी कथित दूसरी पत्नी मार्था मुर्मू ने अनुकंपा पर नौकरी की मांग की।

अदालत में यह दलील दी गई कि दोनों संथाली जनजाति से आते हैं, जहां प्रथागत कानून के तहत दूसरी शादी मान्य है। इसके अलावा, परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।

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कानूनी और सामाजिक पहलू: जहां टकराते हैं नियम और परंपरा

इस फैसले के केंद्र में बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 (नियम 23) है, जो झारखंड में भी लागू है। इसके तहत:

विभागीय अनुमति अनिवार्य: कोई भी सरकारी सेवक पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी नहीं कर सकता, जब तक कि उसने सरकार से पूर्व लिखित अनुमति न ली हो।

परंपरा बनाम सर्विस रूल्स: भले ही संथाली या किसी अन्य कस्टम में दूसरी शादी स्वीकार्य हो, लेकिन सरकारी सेवा में शामिल होते ही कर्मचारी पर सेवा नियमावली (Service Rules) बाध्यकारी हो जाती है।

सामाजिक दृष्टिकोण से उठते बड़े सवाल

भारतीय समाज में कई जनजातीय व ग्रामीण क्षेत्रों में बहुविवाह या दूसरी शादी को सामाजिक स्वीकार्यता प्राप्त है। लेकिन कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से ऐसी शादियों को मान्यता न मिलने के कारण महिला का आर्थिक भविष्य अधर में लटक जाता है।

बच्चों के अधिकार बनाम पत्नी का अधिकार:

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के रामेश्वरी देवी बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला देते हुए साफ किया कि दूसरी शादी से पैदा हुए बच्चों को तो पिता की संपत्ति या पेंशन में हक (वैधता) मिल सकता है, लेकिन दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति या सीधा लाभ नहीं दिया जा सकता।

 

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