बेकन फैक्ट्री को आधुनिक तकनीक से फिर मिलेगा जीवन, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने किया निरीक्षण
रांची। कांके स्थित ऐतिहासिक बेकन फैक्ट्री को आधुनिक तकनीक और नई कार्ययोजना के साथ फिर से जीवंत करने की तैयारी शुरू हो गई है। सोमवार को कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया और इसके पुनर्जीवन में आ रही तकनीकी व प्रशासनिक अड़चनों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान हैदराबाद स्थित National Meat Research Institute (NMRI) से आए विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम भी मौजूद रही। मंत्री ने विशेषज्ञों के साथ फैक्ट्री की मौजूदा तकनीकी स्थिति, आवश्यक सुधार, आधुनिक सुविधाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

सिर्फ फैक्ट्री शुरू करना नहीं, लंबे समय तक चलाना लक्ष्य
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि बेकन फैक्ट्री को केवल दोबारा चालू करना सरकार का लक्ष्य नहीं है। इसे ऐसी आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम इकाई के रूप में विकसित करने की योजना है, जो लंबे समय तक टिकाऊ तरीके से संचालित हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रोजेक्ट तैयार नहीं किया जाना चाहिए जो कुछ वर्षों के बाद तकनीकी या अन्य कारणों से फिर बंद हो जाए। इसी वजह से विशेषज्ञों की तकनीकी जांच और सलाह को महत्व दिया जा रहा है।मंत्री ने फैक्ट्री की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि कूलिंग सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के बाद लंबे समय तक इसके बंद रहने का असर किसानों और पशुपालकों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र पर पड़ा है।

अधिकारियों को तेजी से काम पूरा करने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से लंबित प्रक्रियाओं, तकनीकी अनुमतियों और जरूरी क्लियरेंस की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन कार्यों के लिए आवश्यक स्वीकृति और क्लियरेंस मिल चुके हैं, उन्हें बिना अनावश्यक देरी के पूरा किया जाए।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पुनर्जीवन की योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जल्द से जल्द इसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
पुरानी मशीनों और ऐतिहासिक धरोहर को भी बचाया जाएगा
बेकन फैक्ट्री को आधुनिक बनाने के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक स्वरूप को संरक्षित रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि परिसर में मौजूद पुरानी मशीनरी, उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं को सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि बेकन फैक्ट्री का इतिहास झारखंड के औद्योगिक और पशुपालन क्षेत्र के विकास से जुड़ा रहा है। स्थापना के दौर में यहां आधुनिक तकनीक और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता था।मंत्री के अनुसार, उस दौर में फैक्ट्री के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण के लिए डेनमार्क भेजा गया था। परिसर में मौजूद पुरानी Mercedes वैन भी उस समय आधुनिक तकनीक को अपनाने की सोच की एक मिसाल मानी जाती है।
किसानों और पशुपालकों को मिलेगा लाभ
मंत्री ने कहा कि बेकन फैक्ट्री का पुनर्जीवन केवल एक बंद औद्योगिक इकाई को दोबारा शुरू करने की कवायद नहीं है। इसका सीधा संबंध झारखंड के किसानों और पशुपालकों से है।फैक्ट्री के आधुनिक स्वरूप में लौटने से पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और किसानों-पशुपालकों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार का प्रयास है कि ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर बेकन फैक्ट्री को फिर से एक उपयोगी और टिकाऊ संस्थान के रूप में विकसित किया जाए।

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