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मां दुर्गा के दरबार में दिखा उपायुक्त का ममतामयी रूप, बच्चे की मासूम पुकार पर नन्हें पंडाल में पहुंचीं कंचन सिंह

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नवरात्र की षष्ठी पर भक्ति, वात्सल्य और अपनत्व का अनूठा संगम; बच्चे के छोटे से आग्रह ने जीत लिया सबका दिल

सिमडेगा। मां दुर्गा की आराधना, आस्था और भक्ति से सराबोर नवरात्र की षष्ठी पर सिमडेगा में एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया। मां के दरबार में जहां हर भक्त अपनी श्रद्धा लेकर पहुंच रहा था, वहीं एक मासूम बच्चे की छोटी-सी इच्छा ने प्रशासनिक पद की सारी औपचारिकताओं को पीछे छोड़ दिया। उपायुक्त कंचन सिंह का ममतामयी रूप सामने आया और भक्ति के इस माहौल में वात्सल्य की एक खूबसूरत तस्वीर उभरकर सामने आई।नवयुग संघ राम जानकी मंदिर दुर्गा पूजा पंडाल के उद्घाटन के लिए पहुंचीं उपायुक्त कंचन सिंह मंदिर परिसर स्थित माता रानी के स्थायी मंदिर में दर्शन करने गईं। इसी दौरान मंदिर के पुजारी के नन्हें पुत्र ने बड़ी मासूमियत से उनसे कहा, ”हमारा भी तो पूजा पंडाल देख लीजिए।”

Durga puja
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बच्चे की इस निश्छल पुकार में न कोई औपचारिकता थी, न कोई संकोच, बस अपनी छोटी-सी दुनिया को दिखाने की भोली-सी चाहत थी। उसकी बात सुनकर उपायुक्त के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी। उन्होंने बच्चे के आग्रह को सहर्ष स्वीकार किया और उसके नन्हें पूजा पंडाल को देखने पहुंच गईं।बच्चे के बनाए पंडाल और उसकी कलाकृति को उपायुक्त ने बड़े स्नेह से देखा। उस पल बच्चे के चेहरे की खुशी और उपायुक्त का आत्मीय व्यवहार अपने आप में एक खूबसूरत दृश्य बन गया। मां दुर्गा की भक्ति के बीच एक बच्चे के मन में अपने प्रयास को दिखाने की उत्सुकता और एक अधिकारी के हृदय में उसके प्रति उमड़ा स्नेह, दोनों ने इस अवसर को यादगार बना दिया।

मां के दरबार में दिखी ममता की झलक

नवरात्र केवल मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, ममता और मानवीय संवेदनाओं को आत्मसात करने का भी अवसर है। मां के दरबार में उपायुक्त कंचन सिंह का यह सहज और स्नेहपूर्ण व्यवहार मानो इसी भावना को जीवंत कर गया। बच्चे के छोटे-से आग्रह को महत्व देकर उन्होंने यह अहसास कराया कि किसी के लिए उसका छोटा-सा प्रयास भी बहुत खास होता है और उसे सम्मान देने से उसके चेहरे पर कितनी बड़ी मुस्कान आ सकती है।
इस भावुक पल को देखकर वहां मौजूद महिला श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने उपायुक्त के व्यवहार की सराहना की। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों के बीच यह दृश्य चर्चा का विषय बना रहा। मां दुर्गा की आराधना के बीच घटित यह आत्मीय प्रसंग नवरात्र की यादों में एक सुंदर अध्याय की तरह जुड़ गया, जहां पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर स्नेह, सरलता और मानवीय रिश्तों की गरिमा दिखाई दी।

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