सारंडा जंगल में मिले दो आईईडी बम, सुरक्षा बलों ने मौके पर किया नष्ट; नक्सलियों ने जमीन में छिपाकर रखे थे विस्फोटक
बहदा गांव के पास कोयना नदी किनारे पगडंडी मार्ग से हुई बरामदगी, जनवरी में 17 नक्सलियों के मारे जाने वाले मुठभेड़ स्थल से महज 2-3 किलोमीटर दूर मिला विस्फोटक
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में पुलिस और सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान दो आईईडी बम बरामद कर उन्हें नष्ट कर दिया। आशंका है कि नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से इन विस्फोटकों को जमीन में छिपाकर रखा था।जानकारी के अनुसार, छोटानागरा थाना क्षेत्र के बहदा गांव के पास कोयना नदी किनारे पगडंडी मार्ग के ऊंचे हिस्से में जमीन के अंदर दोनों आईईडी बम छिपाए गए थे। सर्च अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने संदिग्ध स्थान की पहचान की। इसके बाद दोनों विस्फोटकों को बरामद कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिया।जिस इलाके से आईईडी बरामद किए गए हैं, वह पहले भाकपा माओवादी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। यह स्थान इसी वर्ष जनवरी में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ स्थल से महज दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर है। जनवरी में हुई उस मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल दा और 50 लाख रुपये के इनामी अनमोल दा समेत कुल 17 नक्सली मारे गए थे।
पहले भी आईईडी की चपेट में आ चुके हैं ग्रामीण और मवेशी
सारंडा जंगल के इन इलाकों में नक्सलियों द्वारा जमीन के अंदर और जंगल की पगडंडियों पर छिपाकर रखे गए आईईडी बम पहले भी बरामद होते रहे हैं। इन विस्फोटकों की चपेट में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ ग्रामीण और मवेशी भी आ चुके हैं। ऐसे में जंगल के रास्तों में छिपे विस्फोटक स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बने हुए हैं।
नक्सल गतिविधियों पर नजर, लगातार चल रहा सर्च ऑपरेशन
सारंडा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा बलों की ओर से लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ने के बावजूद जंगलों में पहले से लगाए गए आईईडी की मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है। सुरक्षा बलों का अभियान न केवल नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण रखने, बल्कि जंगल में छिपाए गए विस्फोटकों को खोजकर ग्रामीणों और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भी जारी है।

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