गिरिडीह : मारांग बुरु धर्मगाड़ महा सम्मेलन में 5 नवंबर को शामिल होंगे CM हेमंत सोरेन, देशभर से जुटेंगे संथाल समाज के प्रतिनिधि
गिरिडीह। गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड स्थित मधुबन में 4 और 5 नवंबर 2026 को दो दिवसीय ‘मारांग बुरु धर्मगाड़ महा सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा। मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन के दूसरे दिन, 5 नवंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को लेकर आयोजकों और संथाल आदिवासी समाज के लोगों में उत्साह है।सम्मेलन का आयोजन मधुबन स्थित मारांग बुरु हॉल में किया जाएगा। इसमें झारखंड के सभी जिलों के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से संथाल समाज के प्रतिनिधियों, मांझी-परगना, नायके, गोडेत, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।

मारांग बुरु पर पारंपरिक धार्मिक अधिकारों की रक्षा मुख्य मुद्दा
मोर्चा के अध्यक्ष फागु बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी और कोषाध्यक्ष समाय टुडू ने संयुक्त रूप से बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मारांग बुरु यानी पारसनाथ पहाड़ पर संथाल आदिवासी समाज के पारंपरिक धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करना है।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में मुख्यमंत्री के समक्ष मारांग बुरु को संथाल समाज का आधिकारिक धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग उठाई जाएगी। इसके साथ ही सीएनटी एक्ट 1908 और भू-सर्वे खतियान के तहत आदिवासी समाज को प्राप्त पारंपरिक पूजा-अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी रखी जाएगी।मोर्चा ने मारांग बुरु को सम्मेद शिखर के रूप में स्थापित करने से जुड़े एकतरफा फैसलों का विरोध करने की बात कही है। आयोजकों का आरोप है कि इससे संथाल समाज की पारंपरिक पूजा पद्धति, हड़िया का तपन और बलि प्रथा प्रभावित हो सकती है। मोर्चा इन मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की तैयारी कर रहा है।
पुराने न्यायिक फैसलों का भी दिया जाएगा हवाला
मोर्चा के पदाधिकारियों ने अपने पक्ष में वर्ष 1911 के हजारीबाग कोर्ट, 1917 के पटना हाई कोर्ट और 1933 के प्रिवी काउंसिल से जुड़े ऐतिहासिक मामलों का हवाला दिया है। उनका दावा है कि इन फैसलों में संथाल समाज के पारंपरिक अधिकारों को संरक्षण मिला था।
दो दिनों तक होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
सम्मेलन के पहले दिन, 4 नवंबर को सुबह 10 बजे पारंपरिक ‘बोंगा बुरु’ पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद स्वागत भाषण, प्रतिवेदन, प्रस्ताव और अतिथियों का संबोधन होगा। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।वहीं, दूसरे दिन 5 नवंबर को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर परिचर्चा होगी। दोपहर के सत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित है। आयोजकों के अनुसार, दोपहर 1 बजे समाज के पारंपरिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इसके बाद अध्यक्षीय समापन भाषण के साथ सम्मेलन का समापन होगा।
एकजुटता दिखाने की अपील
मारांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा ने झारखंड समेत देशभर के संथाल समाज के लोगों से सम्मेलन में शामिल होने की अपील की है। मोर्चा का कहना है कि यह महा सम्मेलन समाज की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक परंपराओं और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

कांके के प्रेम नगर में अपराधियों की अंधाधुंध फायरिंग, राहुल दुबे गिरोह ने ली जिम्मेदारी
रांची। राजधानी रांची के कांके थाना क्षेत्र स्थित प्रेम नगर में अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर इलाके में दहशत फैला दी। घटना…
बद्रीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास क्रैश, पायलट समेत छह लोगों की मौत
बद्रीनाथ धाम से दर्शन कर लौट रहे हेलीकॉप्टर का जोशीमठ के पास हुआ हादसा, चाय गांव की पहाड़ी के नजदीक टूटा था…

जमशेदपुर में मानवता की मिसाल: पांच साल के मासूम के लिए पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर, 15 मिनट में एंबुलेंस को पहुंचाया NH-33
18 अक्टूबर को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ था सात्विक मांझी, बेहतर इलाज के लिए कोलकाता ले जाने के…

दिल्ली रवाना हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, 1 नवंबर को इंडिया गठबंधन की रैली में होंगे शामिल
दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटेंगे इंडिया गठबंधन के कई प्रमुख नेता, विपक्षी एकजुटता का दिखेगा साझा मंच; शुक्रवार दोपहर रांची से…


















