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स्वामी दयानंद सरस्वती की वैचारिक विरासत को सहेजने की जरूरत, सिमडेगा में पहचान का संकट

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सिमडेगा: महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों और रूढ़िवादी परंपराओं के खिलाफ आवाज उठाकर समाज सुधार की नई चेतना जगाई थी। उन्होंने वेदों के अध्ययन, शिक्षा, सामाजिक समानता और वैचारिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया। उनके विचारों का प्रभाव सिमडेगा में भी रहा है। आर्य समाज मंदिर से लेकर डीएवी पब्लिक स्कूल और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित विद्यालयों तक उनकी वैचारिक विरासत के निशान मौजूद हैं। हालांकि, समय के साथ इस विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

सिमडेगा के हृदयस्थल में थाना के ठीक सामने स्थित आर्य समाज मंदिर इस विरासत का प्रमुख प्रतीक है। स्थानीय स्तर पर लाल बाबा उर्फ देशपाल दीक्षित, जिन्हें दीक्षानंद सरस्वती के नाम से भी जाना जाता था, के निधन से पहले तक यहां शिक्षा, आयुर्वेद, योग और वैदिक विचारों के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया जाता था। मंदिर केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और ज्ञान के प्रसार का महत्वपूर्ण स्थान भी रहा है। आर्य समाज की झारखंड राज्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री पूर्ण चंद ने बताया कि झारखंड राज्य के गठन के बाद आर्य समाज द्वारा संचालित विद्यालयों के संचालन में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं।

स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरित होकर जिले के समाजसेवी लीलू राम अग्रवाल, शंकर अग्रवाल और अन्य बुद्धिजीवियों के प्रयासों से करीब तीन दशक पहले डीएवी पब्लिक स्कूल की शुरुआत हुई थी। इस विद्यालय की स्थापना के पीछे शिक्षा के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाने की सोच और स्वामी दयानंद की वैचारिक प्रेरणा रही। समय के साथ विद्यालय ने जिले के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में अपनी पहचान बनाई।

हालांकि, अब यह चर्चा भी उठ रही है कि विद्यालय की गतिविधियों और सार्वजनिक आयोजनों में उसकी मूल वैचारिक प्रेरणा को कितनी जगह मिल रही है। स्थानीय स्तर पर कुछ लोग विद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद की तस्वीरों को अधिक प्रमुखता दिए जाने पर सवाल उठाते हैं। हालांकि, केवल तस्वीरों की मौजूदगी के आधार पर किसी महापुरुष के विचारों की उपेक्षा का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन यह जरूर विचारणीय है कि संस्थान अपने इतिहास, स्थापना के उद्देश्य और प्रेरणास्रोतों से विद्यार्थियों को कितना परिचित करा रहे हैं।

सिमडेगा की धार्मिक और सामाजिक परंपरा में रामरेखा धाम के ब्रह्मलीन महंत प्रपन्नाचार्य जी महाराज, जिन्हें रामरेखा बाबा के नाम से भी जाना जाता है, का योगदान भी उल्लेखनीय रहा है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरित होकर जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार करने के उद्देश्य से आर्य समाज के नेतृत्व में स्वामी श्रद्धानंद विद्यालय, टैसेरा सहित अन्य विद्यालयों की स्थापना में योगदान दिया था।

बताया जाता है कि लंबोई में भी स्वामी श्रद्धानंद विद्यालय की नींव रखी गई थी, जो वर्तमान में धनुरजय सिंह के नाम से संचालित है। स्वामी श्रद्धानंद के नाम पर विद्यालयों के संचालन को प्रोत्साहित करने के पीछे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने की सोच थी। इन प्रयासों ने जिले में शिक्षा के विस्तार को नई दिशा देने में भूमिका निभाई।

महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती का योगदान केवल धार्मिक सुधार तक सीमित नहीं था। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक समानता, महिला उत्थान, अंधविश्वास के विरोध और तार्किक चिंतन को समाज की प्रगति का आधार माना। ऐसे में सिमडेगा के आर्य समाज मंदिर, डीएवी विद्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार से जुड़ी उनकी वैचारिक विरासत को संरक्षित करना जरूरी है।

उनकी पुण्यतिथि जैसे अवसरों पर जिले में परिचर्चा, व्याख्यान, निबंध प्रतियोगिता और वैदिक विचारों पर संवाद आयोजित किए जा सकते हैं। आर्य समाज से जुड़े पुराने दस्तावेजों, तस्वीरों और विद्यालयों की स्थापना के इतिहास का संकलन भी किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां जिले में हुए सामाजिक और शैक्षणिक बदलावों के पीछे के प्रयासों को जान सकें।

सिमडेगा में स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों से जुड़ी संस्थाएं और स्मृतियां आज भी मौजूद हैं। जरूरत केवल उन्हें याद करने की नहीं, बल्कि उनके विचारों को शिक्षा और सामाजिक जीवन में जीवंत बनाए रखने की है। विरासत को नाम और तस्वीरों तक सीमित रखने के बजाय उसके मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाना ही महर्षि के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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शंभू कुमार सिंह

शंभू कुमार सिंह

रिपोर्टर

शंभू कुमार सिंह सिमडेगा के रहने वाले हैं ये 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत है दैनिक जागरण जिला प्रभारी, भास्कर दैनिक का जिला प्रभारी, सहित की भी चैनल के साथ में अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार सक्रिय रहे है । समाचार संकलन विशेष लेख फीचर व अन्य क्षेत्रों में भी विशेष पकड़।