झारखंड हाईकोर्ट के वकीलों के सोशल मीडिया रील्स पर सख्ती, आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का निर्देश
रांची: झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने वकीलों के सोशल मीडिया पर सक्रियता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने न्यायालय परिसर और न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो और रील्स साझा करने वाले अधिवक्ताओं को तत्काल ऐसी गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया है। साथ ही, पहले से पोस्ट की गई आपत्तिजनक सामग्री हटाने को भी कहा गया है एसोसिएशन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि कुछ अधिवक्ता सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री साझा कर रहे हैं, जो वकालत के पेशे की गरिमा और न्यायालय की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इसमें हाईकोर्ट परिसर की तस्वीरों और वीडियो को गानों के साथ पोस्ट करना, न्यायालय कक्ष में बहस करने की बनावटी मुद्रा में वीडियो बनाना तथा वकालत से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों का प्रचार करना शामिल है।

विज्ञापन और प्रलोभन को लेकर जताई आपत्ति
एसोसिएशन ने विशेष रूप से उन पोस्ट पर आपत्ति जताई है, जिनमें अधिवक्ताओं की फीस का विवरण साझा किया जाता है या मुवक्किलों को आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रचारात्मक सामग्री प्रसारित की जाती है। सूचना में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह की गतिविधियां अधिवक्ताओं द्वारा विज्ञापन और प्रलोभन देने की श्रेणी में आती हैं। एसोसिएशन के अनुसार, यह आचरण अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 36 के प्रावधानों के विपरीत है। एसोसिएशन ने कहा है कि वकालत एक गरिमामयी पेशा है और इससे जुड़े प्रत्येक सदस्य से पेशेवर आचरण तथा न्यायालय की प्रतिष्ठा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
तत्काल पोस्ट हटाने का निर्देश, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव और अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर से जारी सूचना में संबंधित सदस्यों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाएं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर पहले से साझा की गई ऐसी सभी तस्वीरों, वीडियो और अन्य प्रचारात्मक सामग्री को भी तुरंत हटाने को कहा गया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अधिवक्ताओं के मामलों को उचित कार्रवाई के लिए झारखंड राज्य बार काउंसिल के पास भेजा जाएगा।

वकीलों के बीच चर्चा तेज
एसोसिएशन के इस निर्देश के बाद न्यायिक और कानूनी गलियारों में सोशल मीडिया पर अधिवक्ताओं की गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस कदम को वकालत के पेशे की गरिमा और न्यायालय की मर्यादा बनाए रखने की दिशा में सख्त पहल के तौर पर देखा जा रहा है। अब अधिवक्ताओं के सोशल मीडिया पर न्यायिक परिसर से जुड़ी सामग्री साझा करने और पेशेवर प्रचार के तौर-तरीकों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।

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