हाईकोर्ट परिसर में फुटबॉल ग्राउंड से पहले अधिवक्ताओं की मूलभूत सुविधाओं को मिले प्राथमिकता : धीरज कुमार

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय परिसर में फुटबॉल ग्राउंड विकसित किए जाने के प्रस्ताव पर झारखंड उच्च न्यायालय अधिवक्ता गृह निर्माण स्वावलंबी सहकारी समिति के मुख्य कार्यपालक एवं अधिवक्ता धीरज कुमार ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि न्यायालय परिसर की सीमित भूमि का उपयोग सबसे पहले अधिवक्ताओं और न्यायिक व्यवस्था की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाना चाहिए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!धीरज कुमार ने कहा कि उच्च न्यायालय परिसर का मुख्य उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, प्रभावी और सुलभ बनाना है, न कि खेल गतिविधियों का केंद्र बनाना। ऐसे में उपलब्ध भूमि का उपयोग अधिवक्ताओं के चैंबर, अधिवक्ता भवन, आधुनिक विधि पुस्तकालय और अधिवक्ताओं के लिए रियायती आवासीय सुविधाओं के विकास में किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि झारखंड उच्च न्यायालय अधिवक्ता गृह निर्माण स्वावलंबी सहकारी समिति पिछले करीब दस वर्षों से विशेषकर युवा और भूमिहीन अधिवक्ताओं के लिए रियायती दर पर भूमि एवं आवास उपलब्ध कराने की मांग कर रही है। वर्तमान में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के पास शहर में अपना आवास नहीं है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक और व्यावसायिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
धीरज कुमार ने कहा कि जिस प्रकार न्यायाधीशों के लिए कोर्ट रूम और चैंबर आवश्यक हैं, उसी प्रकार अधिवक्ताओं के लिए भी चैंबर अनिवार्य आवश्यकता है। चैंबर के अभाव में अधिवक्ताओं को फाइलों के रखरखाव, मुवक्किलों से गोपनीय चर्चा और मुकदमों की तैयारी में परेशानी होती है।

उन्होंने कहा कि खेल सुविधाओं का अपना महत्व है, लेकिन न्यायालय परिसर की सीमित भूमि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर न्यायिक अवसंरचना के विस्तार के लिए होना चाहिए। देश के कई उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ताओं के लिए बहुमंजिला चैंबर कॉम्प्लेक्स, अधिवक्ता क्लब और सहकारी आवास योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। झारखंड में भी ऐसी दूरदर्शी योजनाएं लागू किए जाने की आवश्यकता है।
धीरज कुमार ने उच्च न्यायालय की बिल्डिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी से आग्रह किया कि अधिवक्ताओं की बुनियादी आवश्यकताओं, विशेषकर चैंबर और रियायती सहकारी आवास, को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को बेहतर कार्य वातावरण और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना केवल बार के हित में नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निवेश है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि झारखंड उच्च न्यायालय प्रशासन अधिवक्ताओं के व्यापक हितों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक अवसंरचना के विकास को लेकर संतुलित और दूरदर्शी निर्णय लेगा।
















