गढ़वा : पिछले लोक अदालत का रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद, 12 सितंबर को हजारों मामलों के निपटारे की तैयारी
गढ़वा : हाई कोर्ट के सर्विस मैटर से लेकर बैंक रिकवरी, भूमि विवाद और कंपाउंडेबल केस होंगे निष्पादित; लोक अदालत में लगेंगे 10 से अधिक विभागों के विशेष स्टॉल
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गढ़वा। गढ़वा में 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में इस बार पिछले लोक अदालत का रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। लंबित मामलों के त्वरित और आपसी सहमति से निपटारे के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने तैयारी तेज कर दी है। गढ़वा जिला व्यवहार न्यायालय परिसर के साथ अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय परिसर, नगर ऊंटारी में भी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश और झालसा, रांची के मार्गदर्शन में होने वाली इस लोक अदालत को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन भी लोगों को समझौते योग्य मामलों को लोक अदालत में लाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष मनोज प्रसाद और पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर लोक अदालत की तैयारियों और इसमें होने वाले मामलों के निष्पादन की जानकारी दी।

हाई कोर्ट के सर्विस मैटर भी होंगे निपटाए
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद ने बताया कि इस बार लोक अदालत में मामलों के निष्पादन का दायरा बढ़ाया गया है। सामान्य लिटिगेशन और प्री-लिटिगेशन मामलों के अलावा हाई कोर्ट में लंबित सर्विस मैटर से जुड़े मामलों का भी निष्पादन किया जाएगा।
लोक अदालत में ऐसे मामलों का आपसी सहमति से समाधान होने के बाद इसकी सूचना हाई कोर्ट को भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मामलों का समाधान दोनों पक्षों की सहमति से होता है। इससे विवाद समाप्त होने के साथ समाज में सौहार्द का वातावरण भी बनता है।
लोक अदालत का फैसला अंतिम
पीडीजे ने बताया कि लोक अदालत में मामलों के निष्पादन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। यहां दोनों पक्षों की सहमति से जो फैसला होता है, उसके खिलाफ सामान्य तौर पर अपील का प्रावधान नहीं है। इसलिए लोक अदालत में निष्पादित फैसला अंतिम माना जाता है।
गढ़वा जिले के न्यायालयों में फिलहाल करीब 26 हजार क्रिमिनल केस लंबित हैं। इनमें समझौते योग्य यानी कंपाउंडेबल मामलों को दोनों पक्षों की सहमति से लोक अदालत के माध्यम से जल्द निपटाने का प्रयास किया जाएगा।
इन मामलों का होगा निपटारा
12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत में कई तरह के मामलों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से—
– लेबर डिस्प्यूट
– लैंड एक्विजिशन
– बैंक रिकवरी
– कंज्यूमर डिस्प्यूट
– भूमि विवाद
– कंपाउंडेबल आपराधिक मामले
– प्री-लिटिगेशन मामले
– अन्य समझौते योग्य लंबित मामले
शामिल हैं।
वन भूमि अतिक्रमण के मामलों में भी समाधान का रास्ता
वन विभाग से जुड़े मामलों में भूमि अतिक्रमण के मामलों के निपटारे को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। पीडीजे ने बताया कि यदि किसी आरोपी व्यक्ति की ओर से शपथ पत्र दिया जाता है कि उसने संबंधित भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया है और भविष्य में भी उस भूमि पर अपना दावा नहीं करेगा, तो ऐसे मामलों का त्वरित निष्पादन संभव है।
विभागों से लंबित मामलों की सूची मांगी गई
उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न विभागों के साथ बैठकें की जा रही हैं। विभागों को अपने स्तर पर लंबित मामलों और सर्टिफिकेट केस को चिन्हित कर लोक अदालत में लाने के लिए कहा गया है।
प्रशासन का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा ऐसे मामलों को लोक अदालत के सामने लाया जाए, जिनका दोनों पक्षों की सहमति से समाधान संभव है।
एसपी आशुतोष शेखर ने बताया कि पुलिस की ओर से भी लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में जागरूक किया जा रहा है। पुलिस समझौते योग्य मामलों में संबंधित पक्षों को लोक अदालत के माध्यम से विवाद का समाधान कराने के लिए प्रेरित कर रही है।
लोक अदालत में लगेंगे विशेष स्टॉल
12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत के साथ सशक्तिकरण शिविर सह विशेष स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इन स्टॉल के जरिए आम लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ पात्र लाभुकों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
इन विभागों के स्टॉल लगाए जाएंगे—
वन, श्रम, चिकित्सा, समाज कल्याण, कल्याण, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग।
इसके अलावा ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) और विशिष्ट पहचान पत्र से संबंधित सेवाओं के लिए UIDAI का स्टॉल भी लगाया जाएगा।
UIDAI के स्टॉल पर ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
प्रशासन का लक्ष्य केवल लंबित मामलों का निपटारा करना नहीं है, बल्कि लोक अदालत में आने वाले लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ना भी है।
एक दिन में अधिक से अधिक मामलों के समाधान की तैयारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकार और जिला प्रशासन की तैयारियों को देखते हुए इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे की उम्मीद है। खास तौर पर हाई कोर्ट के सर्विस मैटर को शामिल किए जाने और विभिन्न विभागों के लंबित मामलों को चिन्हित किए जाने से इस बार लोक अदालत का दायरा पिछले आयोजन की तुलना में बड़ा रहने की संभावना है।

















