25 साल बाद भी सिमडेगा को व्यवस्थित शहर बनाने का सपना अधूरा, सड़क-नाली तक सिमटा शहरी विकास

सिमडेगा: विश्व शहरी नियोजन दिवस पर शहरों को सुव्यवस्थित, सुंदर और आधुनिक बनाने की जरूरत पर चर्चा हो रही है, लेकिन सिमडेगा की तस्वीर अब भी कई बुनियादी समस्याओं को उजागर करती है। जिला गठन के करीब 25 साल बाद भी शहर को सुनियोजित और सुविधायुक्त बनाने की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकी है। शहरी विकास का दायरा मुख्य रूप से सड़क, नाली, विद्युतीकरण और भवन निर्माण तक सीमित नजर आता है। वहीं, पार्किंग, पेयजल, सार्वजनिक शौचालय और अन्य नागरिक सुविधाओं की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

शहर के कई मोहल्लों में सड़कें इतनी संकरी हैं कि आपात स्थिति में एंबुलेंस और अग्निशमन वाहनों के आवागमन में भी परेशानी हो सकती है। मुख्य बाजार में व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से अक्सर यातायात अव्यवस्था की स्थिति बनती है। पेयजल आपूर्ति की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर लोगों को पानी के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के बावजूद उनके नियमित रखरखाव और संचालन की चुनौती बनी हुई है।
नगर परिषद अध्यक्ष ओलिवर लकड़ा ने बताया कि शहर के विकास के लिए योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन फंड की कमी और निजी जमीन की उपलब्धता जैसी समस्याओं के कारण कई योजनाओं को धरातल पर उतारने में परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि शहर में 18 शौचालयों के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा तेलगा खड़िया कॉम्प्लेक्स, मार्केट कॉम्प्लेक्स और क्लब परिसर के विकास को लेकर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि नगर परिषद को अभी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए भी काफी प्रयास करना पड़ रहा है।
नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल उर्फ रिंकू ने कहा कि सिमडेगा को मॉडल शहर बनाने के उद्देश्य से बोर्ड की बैठकों में कई प्रस्ताव लिए गए हैं। इनमें अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शौचालय, मार्केट कॉम्प्लेक्स, क्लब परिसर, बस स्टैंड और टैक्सी स्टैंड का विकास शामिल है। इसके साथ ही सर्वसुविधायुक्त मैरिज हॉल और पार्क निर्माण के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। उनका कहना है कि इन सुविधाओं के विकसित होने से शहर की व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा।

वार्ड पार्षद चंदन डे ने शहर के विकास कार्यों में विभागीय समन्वय की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई बार सड़क निर्माण के बाद पेयजल पाइपलाइन बिछाने और अन्य सुविधाओं के लिए दोबारा खुदाई कर दी जाती है। इससे नई बनी सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण से पहले संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल, कार्ययोजना और पूर्व अनुमति की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने नगर परिषद बोर्ड की बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग और उनमें मीडिया की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाए।
शहरी विकास का मतलब केवल सड़क, नाली और भवन निर्माण नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें लोगों को बेहतर आवागमन, नियमित जलापूर्ति, व्यवस्थित पार्किंग, स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय, हरित क्षेत्र और आधुनिक बाजार जैसी सुविधाएं मिल सकें। इसके लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालीन मास्टर प्लान तैयार करना जरूरी है।
जिला गठन के करीब 25 साल बाद भी सिमडेगा में इन बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल बने हुए हैं। नगर परिषद की ओर से कई योजनाओं और प्रस्तावों की जानकारी दी जा रही है, लेकिन शहरवासियों को इनके धरातल पर उतरने का इंतजार है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिमडेगा को सुंदर, स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए ठोस मास्टर प्लान कब तैयार होगा और उस पर काम कब शुरू होगा?

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