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अहमदाबाद विमान हादसा: ‘मे डे’ सिग्नल का क्या है अर्थ, क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण? जानिए विस्तार से

अहमदाबाद में हाल ही में हुए विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे से पहले विमान के पायलट सुमित सुब्बरवाल ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को “मे डे, मे डे, मे डे” का सिग्नल भेजा था। यह सिग्नल विमानन और समुद्री क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति को दर्शाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय कोड है। लेकिन आखिर ‘मे डे’ क्या है और इसका विमानन में इतना महत्व क्यों है? आइए, इसकी उत्पत्ति और उपयोग को विस्तार से समझते हैं।

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‘मे डे’ सिग्नल क्या है 

‘मे डे’ (Mayday) एक अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन सिग्नल है, जिसका उपयोग विमानन और समुद्री क्षेत्र में तब किया जाता है, जब कोई विमान या जहाज गंभीर संकट में हो और उसे तत्काल सहायता की आवश्यकता हो। यह सिग्नल जीवन-मरण की स्थिति में भेजा जाता है, जैसे कि विमान में आग लगना, इंजन फेल होना, या अन्य गंभीर तकनीकी खराबी। इस सिग्नल को सुनते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल और आसपास के विमान या जहाज तुरंत हरकत में आ जाते हैं।

‘मे डे’ शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के शब्द “m’aider” (मे-दे) से हुई है, जिसका अर्थ है “मेरी मदद करो”। यह शब्द 1923 में लंदन के क्रॉयडन हवाई अड्डे पर कार्यरत सीनियर रेडियो ऑफिसर फ्रेडरिक स्टैनली मॉकफोर्ड द्वारा प्रस्तावित किया गया था। उस समय क्रॉयडन और पेरिस के ले बोर्जेट हवाई अड्डे के बीच हवाई यातायात काफी था, और एक ऐसा शब्द चाहिए था जो आसानी से समझा जाए और आपातकाल को स्पष्ट रूप से दर्शाए। 1927 में इंटरनेशनल रेडियोटेलीग्राफ कन्वेंशन में इसे आधिकारिक रूप से आपातकालीन सिग्नल के रूप में स्वीकार किया गया।

‘मे डे’ सिग्नल का उपयोग

‘मे डे’ सिग्नल का उपयोग सख्त नियमों के तहत होता है। इसे केवल तब भेजा जाता है, जब स्थिति अत्यंत गंभीर हो और तत्काल सहायता की आवश्यकता हो। इस सिग्नल को तीन बार दोहराया जाता है “मे डे, मे डे, मे डे”, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह किसी अन्य शब्द या संदेश के साथ भ्रमित न हो।

‘मे डे’ के अलावा अन्य सिग्नल

विमानन में ‘मे डे’ के अलावा दो अन्य आपातकालीन सिग्नल भी है पहला पैन-पैन (Pan-Pan), यह सिग्नल उन स्थितियों में उपयोग होता है, जो गंभीर हैं लेकिन तत्काल जीवन के लिए खतरा नहीं हैं, जैसे कि तकनीकी खराबी या चिकित्सा आपातकाल। यह फ्रेंच शब्द “panne” (खराबी) से लिया गया है। वहीं दूसरा सिग्नल।सिक्योरिटे (Sécurité) है, इसका उपयोग सुरक्षा से संबंधित जानकारी, जैसे कि खराब मौसम या नेविगेशन खतरे, को साझा करने के लिए किया जाता है।

‘मेडे’ का महत्व और दुरुपयोग पर सजा

‘मे डे’ सिग्नल का महत्व इसकी तात्कालिकता और वैश्विक मान्यता में निहित है। यह सिग्नल सुनते ही सभी रेडियो ट्रैफिक रुक जाते हैं, और प्रभावित विमान को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, इसका दुरुपयोग गंभीर अपराध माना जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, फर्जी ‘मे डे’ कॉल करने पर 6-10 साल की जेल और 250,000 डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है, क्योंकि यह बचाव अभियानों को अनावश्यक रूप से सक्रिय करता है और संसाधनों की बर्बादी करता है।

‘मे डे’ सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक जीवन रक्षक सिग्नल है, जो विमानन और समुद्री क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है। अहमदाबाद विमान हादसे ने इस सिग्नल के महत्व को फिर से उजागर किया। यह हमें याद दिलाता है कि विमानन में सुरक्षा और संचार कितने महत्वपूर्ण हैं, और पायलटों की ट्रेनिंग और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है।

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