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आंध्र प्रदेश के गुंटूर में सरस आजीविका मेला 2026: सिमडेगा की रागी उत्पादों ने मचाया धमाल, ललिता देवी की टीम छा गई

शंभू कुमार सिंह

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गुंटूर/आंध्र प्रदेश : ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सरस आजीविका मेला (SARAS Aajeevika Mela 2026) में झारखंड की सिमडेगा जिले की महिलाओं ने रागी से बने उत्पादों से सबका दिल जीत लिया है। यह मेला 6 जनवरी से 18 जनवरी 2026 तक गुंटूर के रेड्डी कॉलेज के सामने ओपन ग्राउंड में चल रहा है, जिसका उद्घाटन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 8 जनवरी को किया।

मुख्यमंत्री ने उद्घाटन के दौरान कहा, “महिलाएं बचत और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा देखना गर्व की बात है।” उन्होंने SHG महिलाओं को उद्यमी बनाने पर जोर दिया और पारंपरिक हस्तशिल्प व स्थानीय खाद्य उत्पादों के ब्रांडिंग की आवश्यकता बताई। यह पहली बार है जब गुंटूर में इतने बड़े पैमाने पर यह राष्ट्रीय मेला आयोजित हो रहा है, जिसमें 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 300 महिलाएं भाग ले रही हैं। कुल करीब 320 स्टॉल लगे हैं, जहां हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक खाद्य और अन्य ग्रामीण उत्पाद प्रदर्शित हो रहे हैं।

सिमडेगा की रागी उत्पादों ने मेला में लहराया झारखंड का परचम

झारखंड की मां बाघचंडी आजीविका स्वयं सहायता समूह (कोलेबिरा प्रखंड, सिमडेगा) ने पलाश ब्रांड के तहत रागी आधारित उत्पादों को पेश किया, जो मेले में सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं रागी लड्डू, रागी मिक्सचर, तिल लड्डू, रागी आटा और रागी पापड़

समूह की अध्यक्ष ललिता देवी ने बताया, “भाषा की थोड़ी समस्या होने के बावजूद लोग रागी के पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभों को उत्सुकता से समझ रहे हैं। वे लड्डू, आटा और पापड़ की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। गुंटूर में मिलने वाला यह सुखद अनुभव और लोगों का सहयोग हमारे लिए प्रेरणादायक है। झारखंड आजीविका टीम को भी भरपूर समर्थन मिल रहा है, और उत्पादों की मांग बहुत तेज है।”

पलाश ब्रांड झारखंड राज्य आजीविका प्रोत्साहन सोसाइटी (JSLPS) की पहल है, जो ग्रामीण महिलाओं को उत्पादन, पैकेजिंग और मार्केटिंग में सशक्त बनाती है। रागी जैसे पौष्टिक मिलेट से बने ये उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण खासतौर पर आकर्षित कर रहे हैं।

झारखंड के अन्य स्टॉल भी खास

झारखंड के तीन जिलों से स्टॉल लगे हैं, जो पलाश और आदिवा ब्रांड के तहत उत्पाद बेच रहे हैं। दुमका जिले के वर्षा आजीविका समूह आदिवा ब्रांड के पारंपरिक हस्तनिर्मित आभूषण, जो हर उम्र की महिलाओं को भा रहे हैं, वहीं गोड्डा जिले के रिमझिम आजीविका समूह के तसर सिल्क की साड़ियां, सूट पीस और दुपट्टे, जिनकी गुणवत्ता और डिजाइन ने खरीदारों को प्रभावित किया।

मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों के झूले और फूड कोर्ट भी हैं, जिससे यह सिर्फ व्यापारिक आयोजन नहीं बल्कि मनोरंजन का केंद्र बन गया है। यह मेला महिलाओं के सशक्तिकरण, उद्यमिता और ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का शानदार उदाहरण है।

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