सितंबर के पहले पखवाड़े तक पूर्ण होगी बालू घाटों की नीलामी, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के सभी व्यावसायिक बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया को सितंबर 2025 के पहले पखवाड़े तक पूरा करने का निर्देश जारी किया है। मुख्य सचिव अलका तिवारी ने सभी उपायुक्तों को इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों के साथ हुई बैठक में उन्होंने नई बालू नीति को पूरी तरह समझने और नीलामी से पहले सभी तकनीकी पहलुओं पर प्रशिक्षण लेने पर जोर दिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अलका तिवारी ने कहा कि नई बालू नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर बालू उपलब्ध कराना, अवैध बालू कारोबार पर रोक लगाना और अन्य राज्यों से बालू के आयात को हतोत्साहित करना है। उन्होंने उपायुक्तों से नीलामी प्रक्रिया को पूरी स्पष्टता और तैयारी के साथ संपन्न करने को कहा, ताकि कोई तकनीकी समस्या न आए। इसके लिए खनन पदाधिकारियों को भी प्रशिक्षित करने की सलाह दी गई।
खान विभाग और उपायुक्तों की महत्वपूर्ण भूमिका
खान सचिव अरवा राजकमल और खान निदेशक राहुल सिन्हा ने कहा कि बालू घाटों की नीलामी में उपायुक्तों की भूमिका अहम होगी। उन्होंने उपायुक्तों को नीलामी प्रक्रिया का मॉक ड्रिल करने और बोली लगाने वालों को पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने की सलाह दी। जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
15 अक्टूबर से शुरू होगा खनन
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 15 अक्टूबर 2025 के बाद राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (ग्रीन ट्रिब्यूनल) का बालू खनन पर प्रतिबंध समाप्त हो जाएगा। नीलामी समय पर पूरी होने से खनन कार्य तुरंत शुरू हो सकेगा, जिससे राज्य में बालू की कमी नहीं होगी। सरकार बालू की कीमत निर्धारित नहीं करेगी, लेकिन वैध कारोबार सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा पूरी व्यवस्था की जाएगी। नियमों का पालन न करने वाले ठेकेदारों का ठेका रद्द करने का अधिकार उपायुक्तों को होगा।
बालू घाटों का वर्गीकरण
बालू घाटों को दो श्रेणियों में बांटा गया है पहली श्रेणी में 5 हेक्टेयर से कम क्षेत्र वाले 374 बालू घाट, जिनका संचालन ग्राम सभा के माध्यम से होगा। दूसरी श्रेणी में 5 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र वाले बालू घाट, जिन्हें 60 समूहों में बांटा गया है। नई नीति के तहत किसी भी व्यक्ति को 1,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र का बालू घाट या दो से अधिक समूहों का ठेका नहीं दिया जाएगा।
तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर जोर
नीलामी प्रक्रिया की जानकारी उपायुक्तों को पीपीटी के माध्यम से दी गई। पर्यावरणीय मुद्दों पर सिया के सदस्य श्री राजीव लोचन बख्शी ने विस्तार से चर्चा की, जबकि जैप आइटी के प्रतिनिधियों ने नीलामी की तकनीकी प्रक्रिया को स्पष्ट किया, ताकि कोई असमंजस न रहे।

















