Screenshot 2024 10 08 17 54 05

झारखंड सरकार मुआवजा कष्ट या आपदा नहीं, राजनीतिक फायदे के हिसाब से तय करती है: बाबूलाल मरांडी

झारखंड सरकार मुआवजा कष्ट या आपदा नहीं, राजनीतिक फायदे के हिसाब से तय करती है: बाबूलाल मरांडी

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

रांची। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में मुआवजा का निर्धारण अब पीड़ितों की स्थिति या आपदा की गंभीरता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक फायदे को देखकर किया जा रहा है।

मरांडी ने कहा, “दुखद है कि झारखंड में अब मुआवजा कष्ट और आपदा को देखकर नहीं दिया जाता, बल्कि राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जाती है। इसी कारण कड़ाके की ठंड में बेघर हुए परिवारों की ओर सरकार की कोई नजर नहीं पड़ती।”उन्होंने रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के बाद बेघर हुए लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिवारों की पीड़ा सबने देखी, मगर सरकार को छोड़कर। “इन लोगों को न तो मुआवजा मिला, न ही कोई सांत्वना दी गई।”

मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार के कारण लोगों को बार-बार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। “चाहे पेसा कानून का मामला हो या रिम्स अतिक्रमण, हर बड़े फैसले के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ता है। सरकार हाईकोर्ट के आदेशों को भी टालने की कोशिश करती है।”

हाईकोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए मरांडी ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तत्कालीन अंचल अधिकारी, नक्शा स्वीकृत करने वाले अधिकारी, रांची नगर निगम के बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सेक्शन के अधिकारी, निगरानी में विफल रहे सभी कर्मचारी, बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।उन्होंने कहा, “मुआवजे का बोझ पीड़ितों पर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों और बिल्डरों पर ही डाला जाना चाहिए। सरकार से सहयोग की तो उम्मीद नहीं, लेकिन कम से कम इस जांच और कार्रवाई में कोई अड़चन न डाली जाए।”

मरांडी ने कहा कि राज्य में वर्तमान स्थिति यह है कि लगभग हर छोटे-बड़े फैसले को लागू कराने के लिए लोगों को हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है, जो सरकार की विफलता को दर्शाता है।

Share via
Share via