Babulal latter to cm

झारखंड: बाबूलाल मरांडी का सीएम को पत्र, RWD अभियंताओं को दी जा रही धमकियों पर जताई चिंता; FIR की मांग

​झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने CM को पत्र लिखकर RWD अभियंताओं को मिल रही धमकियों पर गंभीर चिंता जताई है। जानें क्या है बब्बू मिश्रा पर लगा आरोप और क्यों अभियंताओं ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

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रांची: झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) में चल रहे कथित ‘बिचौलिया राज’ और अधिकारियों के उत्पीड़न पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने विभाग के सहायक एवं कार्यपालक अभियंताओं द्वारा हस्ताक्षरित एक सामूहिक शिकायत पत्र का हवाला देते हुए राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं।

अभियंताओं ने दी है कार्य बहिष्कार की चेतावनी

​बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं ने संयुक्त रूप से एक शिकायत दर्ज कराई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अशोक नगर (रांची) निवासी बब्बू मिश्रा नामक व्यक्ति द्वारा निविदा (Tender) प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जा रहा है।

​अभियंताओं का आरोप है कि उन्हें:

  • ​मनचाहे ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए फोन पर धमकाया जा रहा है।
  • ​अधिकारियों के साथ अभद्र भाषा और गाली-गलौज की जा रही है।
  • ​बात न मानने पर तबादले (Transfer) और सेवा समाप्ति की धमकियां दी जा रही हैं।

​पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि इन बाहरी तत्वों पर लगाम नहीं लगाई गई और अधिकारियों को सुरक्षा नहीं मिली, तो वे कार्य बहिष्कार करने को मजबूर होंगे।

‘बिचौलियों के आतंक से पंगु हो रही व्यवस्था’

​मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मरांडी ने कहा कि राज्य के विकास कार्यों में इस प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, बल्कि ईमानदार अधिकारियों का मनोबल भी तोड़ता है। उन्होंने पूछा कि अगर सरकारी अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और निष्पक्ष विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

बाबूलाल मरांडी की मुख्य मांगें:

  1. FIR दर्ज हो: शिकायत पत्र में नामित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  2. प्रशासनिक संरक्षण: अभियंताओं को भयमुक्त वातावरण में काम करने के लिए उचित सुरक्षा और संरक्षण प्रदान किया जाए।
  3. चिन्हीकरण: निविदा प्रक्रिया में दखल देने वाले सभी बाहरी बिचौलियों को चिन्हित कर उन पर नकेल कसी जाए।

विकास कार्यों पर संकट

​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभियंताओं की यह समस्या हल नहीं हुई, तो राज्य में चल रही ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे की योजनाएं ठप हो सकती हैं। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस गंभीर शिकायत पर क्या संज्ञान लेता है।

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