सीएम हेमंत सोरेन और ‘अवैध डीजीपी’ पर बाबूलाल मरांडी का तीखा प्रहार, कहा- लूट के सौदागरों को चारा घोटाले की तरह सजा मिलेगी
रांची : झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के डीजीपी पर अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मरांडी ने कहा कि सीएम और ‘अवैध डीजीपी’ के इशारे पर कई लुटेरे राज्य को खोखला करने वाली अवैध कारगुजारियों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव की तरह झारखंड के इन ‘लुटेरों’ को भी सजा का सामना करना पड़ेगा, भले ही इसमें समय लगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बाबूलाल मरांडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के अवैध डीजीपी के संरक्षण में कई लुटेरे अवैध गतिविधियों को दे रहे अंजाम। जब तक बचाना है राज्य सरकार बचा ले, चारा घोटाले में लालू प्रसाद की तरह झारखंड के भी लुटेरों को सजा होगी।”
मरांडी ने रामगढ़ पुलिस के वांटेड अपराधी राजेश राम का मामला उठाते हुए कहा कि जमानत पर बाहर होने के बावजूद वह डीजीपी कार्यालय में लगातार आता-जाता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया। उन्होंने दावा किया, “पहली बार जब राजेश राम गिरफ्तार हुआ था, उसके बाद इंस्पेक्टर गणेश सिंह ने भुरकुंडा थाना प्रभारी से बात की थी। यह शायद वही गणेश हैं जिन्हें अवैध डीजीपी का वरदहस्त प्राप्त है, या यूं कहें तो अवैध डीजीपी के ‘अवैध संसाधन’ संग्रहकर्ताओं की टीम के प्रमुख सदस्य हैं।”
उन्होंने एक वायरल ऑडियो का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस मुख्यालय में तैनात सिपाही रंजीत राणा, जो डीजीपी अनुराग गुप्ता के करीबी माने जाते हैं, ने ओडिशा के एक कारोबारी से संपर्क करने का प्रयास किया। मरांडी के अनुसार, इसी कारोबारी से राजेश राम ने कथित रूप से 65 लाख रुपये की वसूली की थी।
मरांडी ने इन घटनाक्रम को ‘फिल्मी स्क्रिप्ट’ जैसा बताते हुए खारिज किया और कहा, “ये बातें सभी को कोई फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा दिखाई देता होगा, लेकिन यह हकीक़त है। झारखंड को लूटकर खोखला करने की हकीक़त… राजेश, गणेश, राणा, दीपक जैसे कई और महारथी तो इस महालूट के किरदार मात्र हैं, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अवैध डीजीपी के इशारे पर अपने-अपने हिस्से के गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।”
उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन से सीधे सवाल पूछा, “हेमंत सोरेन जी को मेरे 1 मई 2025 का यह ट्वीट संज्ञान में होगा। अगर भूल गये हों तो फिर से देख लें फिर यह बताएं कि- इन अवैध वसूलियों में उनकी कितनी हिस्सेदारी है?”
मरांडी ने शराब घोटाले का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर चार्जशीट न दाखिल करने से छत्तीसगढ़ से लेकर एनसीआर दिल्ली तक के धनपशु माफियाओं को जमानत मिल गई, जिसमें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का ‘वारा न्यारा’ होने की चर्चा है। उन्होंने पूछा, “इसमें मुख्यमंत्री को कितना शेयर मिला? अगर नहीं मिला तो चार्ज शीट न कर पाने के ज़िम्मेवार किन अफ़सरों पर उन्होंने कठोर कार्रवाई किया है और उन्हें क्या सज़ा मिली?”
मरांडी ने कहा कि उन्होंने पहले भी राणा और गणेश जैसे लोगों के कार्यकलापों को मुख्यमंत्री के संज्ञान और सोशल मीडिया पर लाया था, लेकिन इन गंभीर मामलों में उनकी ‘चुप्पी’ का राज क्या है?
अपने बयान के अंत में मरांडी ने चारा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा, “हेमंत जी, आज से करीब 30 साल पहले जब तकनीक विकसित नहीं हुई थी, तब भी जांच एजेंसियों ने चारा घोटाले का पर्दाफाश कर घोटालेबाजों को कड़ी सजा दिलाने का काम किया था। अब तो तकनीक काफी आगे जा चुकी है। आप यह कैसे मान बैठे हैं कि आप जो मर्जी सो लूट करते रहेंगे और मंहगे वकीलों के दम पर हर बार बच ही जायेंगे?”
उन्होंने कड़ी चेतावनी दी, “कहीं लिखकर रख लीजिये। भले ही थोड़ा वक्त लगे लेकिन इन महाघोटालों के लिये देर सबेर आप पकड़े जायेंगे और सजा भी होगी। लालू प्रसाद जी को ही देख लीजिये। बीस साल लगे जरूर लेकिन सजा तो हुई ही। बबूल का पेड़ लगा रहे हैं तो कॉंटे भी तो आपको ही चुभेंगे न।”
मरांडी ने जोर देकर कहा, “झारखंड को लूटने का और सबूत मिटाने का जितना भी षड्यंत्र मुख्यमंत्री कर लें… लेकिन जांच एजेंसियां किसी को बख्शने वाली नहीं है, सबका हिसाब होगा, बराबर हिसाब होगा।”

















