झारखंड में यूरिया खाद की कमी पर भाजपा सांसद आदित्य साहू का राज्य सरकार पर हमला: “केंद्र पर दोष मढ़ने से पहले अपनी जिम्मेदारी निभाए हेमंत सरकार”
रांची: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश महामंत्री और सांसद आदित्य साहू ने झारखंड में यूरिया खाद की कमी को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार अपने विभागीय कार्यों से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त है, जिसके चलते किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध नहीं हो रहा है।
आदित्य साहू ने कहा कि केंद्र सरकार यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि नीम कोटेड यूरिया की शुरुआत के कारण अब यूरिया का उपयोग केवल कृषि कार्यों तक सीमित हो गया है, जिससे पहले के दौर में होने वाले लाठी-डंडे, धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों का अंत हुआ है।
सिंदरी खाद कारखाना और लिक्विड यूरिया प्लांट पर जोर
सांसद ने केंद्र सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड के धनबाद में सिंदरी खाद कारखाना को फिर से शुरू किया जा रहा है, जिसके जल्द ही पूर्ण क्षमता के साथ नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, देवघर में लिक्विड यूरिया प्लांट की स्थापना भी की गई है, जो किसानों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गांव, गरीब और किसानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अथक प्रयास कर रही है।
राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप
आदित्य साहू ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसने यूरिया की मांग को लेकर कोई पूर्व तैयारी नहीं की और समय पर केंद्र को आवश्यकता की सूचना नहीं दी। उन्होंने कहा, “अच्छी बारिश के कारण देशभर में यूरिया की मांग बढ़ी है। केंद्र सरकार इस मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति और उत्पादन पर विशेष ध्यान दे रही है, लेकिन राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है।”
कालाबाजारी पर नियंत्रण की जिम्मेदारी
सांसद ने कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूलने की बढ़ती संभावनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि इस पर नियंत्रण और कार्रवाई करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के मंत्रियों ने कितने पैक्स और दुकानों पर औचक निरीक्षण किया और कितनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार को यह बताना चाहिए कि उन्होंने कालाबाजारी रोकने के लिए क्या कदम उठाए।”
“हेमंत सरकार किसान विरोधी”
आदित्य साहू ने हेमंत सरकार को पूरी तरह किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि धान खरीद के मामले में भी किसानों को केवल बड़े-बड़े वादे सुनने को मिले, लेकिन धरातल पर वे औने-पौने दामों पर बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण किसान लगातार परेशान हो रहे हैं।
केंद्र की प्रतिबद्धता पर जोर
सांसद ने केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यूरिया की एक बोरी की कीमत भारत में 266 रुपये है, जबकि पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान (800 रुपये), बांग्लादेश (720 रुपये) और चीन (2,100 रुपये) में यह कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कोविड और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों के बावजूद किसानों को सस्ती कीमत पर खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।
आदित्य साहू ने राज्य सरकार से अपील की कि वह केंद्र पर दोषारोपण करने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाए और किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए।

















