धनबाद टुंडी में सब्सिडी वाली यूरिया की कथित कालाबाजारी, किसानों से अधिक कीमत वसूलने की शिकायत
Dhanbad News: झारखंड के धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड में सब्सिडी वाली यूरिया किसानों तक निर्धारित कीमत पर पहुंचने के बजाय कथित तौर पर अधिक दाम में बेचे जाने का मामला सामने आया है। किसानों ने कुछ दुकानदारों पर यूरिया की बोरी के लिए तय सरकारी दर से कई गुना अधिक रकम वसूलने का आरोप लगाया है। शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और छापेमारी के निर्देश दिए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!किसानों का आरोप है कि 45 किलो की यूरिया बोरी की निर्धारित कीमत 266.50 रुपये है, लेकिन कुछ स्थानों पर उनसे इससे काफी अधिक रकम ली जा रही है। आरोप है कि यूरिया के लिए 12 से 16 रुपये प्रति किलो तक की दर से पैसे मांगे जा रहे हैं। इससे एक बोरी पर किसानों को निर्धारित कीमत की तुलना में काफी अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।

किसानों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय किसानों का कहना है कि खेती के सीजन में खाद की जरूरत बढ़ जाने के कारण उन्हें ऊंची कीमत पर भी यूरिया खरीदने की मजबूरी होती है। किसानों का आरोप है कि समय पर खाद नहीं मिलने के डर से कई लोग दुकानदारों की ओर से बताई गई कीमत देने को मजबूर हैं।
स्थानीय स्तर पर कुछ दुकानदारों और बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। कुछ विक्रेताओं के लाइसेंस और खाद बिक्री की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है।

डीसी ने दिए जांच और छापेमारी के निर्देश
मामले की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने संबंधित अधिकारियों को जांच और छापेमारी के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने और अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि किसानों से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें कितनी सही हैं और यदि अनियमितता पाई जाती है तो इसके पीछे केवल विक्रेता स्तर की गड़बड़ी है या आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था में भी किसी तरह की लापरवाही हुई है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
यूरिया पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी का उद्देश्य किसानों को सस्ती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं, तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा।
टुंडी में शुरू हुई जांच से अब किसानों को उम्मीद है कि खाद की बिक्री निर्धारित दर पर सुनिश्चित होगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

















