विधायक जयराम महतो का विवादित कॉल : बरवाअड्डा थाना प्रभारी को कथित धमकी, ऑडियो वायरल
धनबाद: बरवाअड्डा थाना परिसर में 21 अगस्त को हुई झड़प और हंगामे के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। डुमरी विधायक जयराम महतो समेत कई लोगों के खिलाफ थाना प्रभारी की शिकायत पर दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में सरकारी काम में बाधा डालने समेत विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस की शिकायत के अनुसार, गणेश दास को हिरासत में लिए जाने की सूचना के बाद जेएलकेएम समर्थकों की बड़ी संख्या बरवाअड्डा थाना परिसर में पहुंची। आरोप है कि भीड़ थाना परिसर के अंदर तक पहुंच गई और वहां हंगामा किया गया। इससे पुलिस की सामान्य कार्यवाही प्रभावित हुई। मामले में विधायक जयराम महतो समेत 10 नामजद और करीब 40-50 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

थाना प्रभारी के दावे से बढ़ा विवाद
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस कथित मोबाइल कॉल को लेकर है, जिसका ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। थाना प्रभारी रवि कुमार की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घटना के दिन विधायक जयराम महतो ने उन्हें फोन किया और कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए धमकी दी।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो की स्वतंत्र और आधिकारिक फॉरेंसिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में ऑडियो में मौजूद आवाज और बातचीत को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सोशल मीडिया लाइव के बाद जुटी थी भीड़?
थाना प्रभारी की शिकायत में यह भी कहा गया है कि जेएलकेएम नेता दिलीप चौधरी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर आरोप लगाया था कि हिरासत में लिए गए गणेश दास के साथ पुलिस ने मारपीट की। इसके बाद समर्थकों की भीड़ थाना परिसर में पहुंची।
पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए थाना परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो प्राथमिकी में उनके नाम जोड़े जा सकते हैं।

राजनीतिक प्रताड़ना का आरोप
दूसरी ओर, जयराम महतो और उनके समर्थकों की ओर से पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक प्रताड़ना से जोड़कर देखा जा रहा है। जेएलकेएम समर्थकों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और केवल राजनीतिक दबाव के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
वहीं पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
फिलहाल इस पूरे विवाद में तीन अहम सवाल हैं—थाना परिसर में वास्तव में क्या हुआ, वायरल ऑडियो असली है या नहीं और उसमें मौजूद आवाज किसकी है? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक जांच से मिलने की उम्मीद है।

















