President to honor Dhanbad teacher on September 5.

धनबाद शिक्षिका ने जगाई शिक्षा की ज्वाला, 5 सितंबर को राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

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धनबाद: देश की कोयला राजधानी के रूप में पहचान रखने वाले धनबाद ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति भवन में उन्हें सम्मानित करेंगी। यह उपलब्धि धनबाद के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि करीब 28 साल बाद जिले के किसी शिक्षक को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलने जा रहा है।

मुनमुन भट्टाचार्य ने सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद विद्यालय में शिक्षा को नए तरीके से आगे बढ़ाया। उन्होंने पारंपरिक पढ़ाई के साथ नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया, जिससे कठिन विषय भी विद्यार्थियों के लिए आसान और रोचक बने। विभिन्न परियोजनाओं और गतिविधियों के जरिए बच्चों में समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।

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जल संरक्षण को बनाया शिक्षा का हिस्सा

विद्यालय में शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मुनमुन भट्टाचार्य की पहल पर वर्षा जल संचयन और छोटे जल संरक्षण प्रकल्पों को बढ़ावा दिया गया। इससे विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

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पोषण योजना में भी निभाई अहम भूमिका

प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM POSHAN) के बेहतर क्रियान्वयन में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने विद्यालय में मिलने वाले भोजन को केवल खानापूर्ति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पोषण और स्वास्थ्य के प्रति बच्चों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्रियों के इस्तेमाल और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की निगरानी को भी व्यवस्थित किया गया।

इन प्रयासों का असर विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी दिखाई दिया। विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार के साथ पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि बढ़ी। शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ, जिससे विद्यालय में सामुदायिक भागीदारी मजबूत हुई।

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धनबाद के लिए 28 साल बाद बड़ी उपलब्धि

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के चयन में मुनमुन भट्टाचार्य ने जिले से चयनित अन्य दावेदारों के बीच अपनी जगह बनाई। इससे पहले धनबाद के तीन शिक्षकों को यह सम्मान मिल चुका है। इनमें स्वर्गीय मेटमुनी खलखो (1989), बबुआ ठाकुर (1996) और सुरेश कुमारी मेहता (1997) शामिल हैं। अब वर्ष 2026 में मुनमुन भट्टाचार्य इस सूची में चौथा नाम जोड़ने जा रही हैं।

उनकी इस उपलब्धि से स्थानीय शिक्षा जगत में उत्साह का माहौल है। सहकर्मियों और अभिभावकों का कहना है कि यह सम्मान केवल एक शिक्षिका की उपलब्धि नहीं, बल्कि विद्यालय, विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूरे समुदाय की सामूहिक मेहनत की पहचान है।

मुनमुन भट्टाचार्य की कहानी यह बताती है कि संसाधनों की कमी शिक्षा में बदलाव की राह में हमेशा बाधा नहीं बनती। सही सोच, नवाचार और समुदाय की भागीदारी के जरिए छोटे विद्यालय भी बड़े बदलाव की मिसाल बन सकते हैं। 5 सितंबर को राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलने के साथ धनबाद की यह शैक्षिक उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बनाएगी।

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