CAG REPORT

CAG रिपोर्ट: झारखंड का राजकोषीय घाटा बढ़कर 14,527 करोड़, बजट का 20.61% खर्च नहीं हुआ

CAG REPORT

रांची। झारखंड की वित्तीय स्थिति को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की अर्थव्यवस्था ने 10.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, लेकिन दूसरी ओर राजकोषीय घाटा, सब्सिडी और सरकारी कर्ज में बढ़ोतरी के साथ बजट प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे हैं।

एक साल में राजकोषीय घाटा दोगुने से अधिक

CAG के अनुसार 2023-24 में झारखंड का राजकोषीय घाटा 6,332 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 14,527 करोड़ रुपये हो गया। सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात में भी यह घाटा 1.36 प्रतिशत से बढ़कर 2.81 प्रतिशत हो गया।
हालांकि, यह आंकड़ा FRBM कानून के तहत निर्धारित 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रहा।

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बजट का 31,110 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सका

रिपोर्ट में बजट प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल बजट 1,50,938.84 करोड़ रुपये था। इसमें से 31,110 करोड़ रुपये यानी 20.61 प्रतिशत राशि खर्च नहीं हो सकी।
CAG के मुताबिक 46 मामलों में 5,407 करोड़ रुपये के अनुपूरक प्रावधान भी किए गए, जिन्हें अनावश्यक माना गया, क्योंकि संबंधित खर्च मूल बजट में उपलब्ध राशि तक भी नहीं पहुंच पाया था।

पूंजीगत खर्च में 2,160 करोड़ रुपये की कमी

झारखंड सरकार ने 2023-24 में पूंजीगत मद में 20,570 करोड़ रुपये खर्च किए थे। 2024-25 में यह घटकर 18,410 करोड़ रुपये रह गया। यानी एक साल में पूंजीगत खर्च में करीब 2,160 करोड़ रुपये की कमी आई।
CAG ने इसे बजट में परिसंपत्तियों के निर्माण और आधारभूत संरचना पर कम खर्च की स्थिति से जोड़कर देखा है।

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सब्सिडी का खर्च बढ़कर 7,889 करोड़ रुपये

रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सब्सिडी पर खर्च भी तेजी से बढ़ा है। 2023-24 में सब्सिडी पर 4,831 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2024-25 में बढ़कर 7,889 करोड़ रुपये हो गए।
इसमें ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित सब्सिडी का हिस्सा करीब 5,537 करोड़ रुपये, यानी लगभग 70 प्रतिशत रहा।
राज्य पर 1.30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी
CAG के आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में राज्य सरकार की बकाया देनदारी 1,09,184.99 करोड़ रुपये थी। 2024-25 में यह बढ़कर 1,30,798.56 करोड़ रुपये हो गई।
हालांकि GSDP के अनुपात में कुल कर्ज का स्तर 2020-21 के 36.80 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 25.34 प्रतिशत रह गया।

1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित

रिपोर्ट में सरकारी राशि के उपयोग की निगरानी को लेकर भी गंभीर बिंदु उठाया गया है। 31 मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ रुपये से संबंधित 52,855 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित थे।
CAG ने कहा है कि बड़ी संख्या में उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित रहने से सरकारी धन के दुरुपयोग का जोखिम बना रहता है।

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4,531 करोड़ रुपये के 17,877 DC बिल लंबित

CAG के अनुसार 31 मार्च 2025 तक 17,877 DC विपत्रों के विरुद्ध करीब 4,531 करोड़ रुपये के दस्तावेज महालेखाकार को प्रस्तुत करने के लिए लंबित थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक अग्रिम राशि का समायोजन नहीं होने से दुर्विनियोजन का जोखिम रहता है।

306.62 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च भी सामने आया

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024-25 के दौरान एक मामले में विधानसभा द्वारा स्वीकृत राशि से 306.62 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए गए। इसके अलावा पिछले वर्षों से संबंधित 4,046.43 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च को भी मार्च 2025 तक नियमित नहीं किया गया था।

अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 10.87 प्रतिशत

इन वित्तीय चुनौतियों के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था ने 2024-25 में 10.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। झारखंड का भारत के सकल घरेलू उत्पाद में योगदान करीब 1.56 प्रतिशत रहा।

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Drishti Now

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वरिष्ठ संवाददाता

झारखंड की राजनीति, प्रशासन और स्थानीय खबरों पर लंबे समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।