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सिमडेगा को बाल विवाह और डायन प्रथा मुक्त बनाने की मुहिम तेज, अनुमंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित

शंभू कुमार सिंह

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सिमडेगा : जिला प्रशासन द्वारा सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए सिमडेगा को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में अनुमंडल स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। नगर भवन में आयोजित इस कार्यशाला में बाल विवाह, डायन प्रथा और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त कंचन सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त इन कुरीतियों के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराना और उन्हें समाप्त करने की दिशा में सामूहिक प्रयास करना था। जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में डीसी कंचन सिंह, डीडीसी दीपांकर चौधरी, जिप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित सभी प्रखंडों के बीडीओ तथा जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

समाज कल्याण अधिकारी ने विषय प्रवेश कराते हुए बताया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास को प्रभावित करती है। सिमडेगा जिले में बाल विवाह की दर लगभग 16 प्रतिशत है। कानूनी रूप से लड़कियों की विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है। वहीं, डायन प्रथा को एक घोर कुप्रथा बताते हुए कहा गया कि इसमें महिलाओं को डायन या चुड़ैल करार देकर उत्पीड़न और हिंसा की जाती है, जो समाज के लिए कलंक है।

अपने संबोधन में डीडीसी दीपांकर चौधरी ने कहा कि इन कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने और लोगों को प्रेरित करने की जरूरत है। उपस्थित लोगों ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया।

उपायुक्त कंचन सिंह ने सभी प्रखंडों के बीडीओ और जनप्रतिनिधियों से सिमडेगा एवं झारखंड को बाल विवाह और डायन प्रथा मुक्त बनाने में पूर्ण सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “जब हर व्यक्ति समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, तभी हम इन कुरीतियों से मुक्त हो पाएंगे।”

कार्यक्रम में गीत-संगीत के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों को दर्शाया गया। अंत में डीसी कंचन सिंह ने सभी को सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने तथा बाल विवाह और डायन प्रथा मुक्त झारखंड बनाने की शपथ दिलवाई। साथ ही, आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए उपयोगी दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

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