डालसा की बहु-हितधारक परामर्श कार्यशाला में नशा व बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का संकल्प, पीडीजे बोले— बाल विवाह और नशे को रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से शुक्रवार को व्यवहार न्यायालय परिसर, सिमडेगा में जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा, उपायुक्त कंचन सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरंजन सिंह तथा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए डालसा सचिव मरियम हेमरोम ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिले को नशा मुक्त और बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है।
बच्चों के साथ दुर्व्यवहार अस्वीकार्य : पीडीजे
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। सिमडेगा जिला बाल विवाह उन्मूलन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह कराने वालों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में भी शिकायत की जा सकती है।
पीडीजे ने कहा कि ऐसी शादियों को समय रहते रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम में लड़कों की आयु और पहचान की जांच को भी बेहद जरूरी बताया।
नशा कारोबार के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी
पीडीजे राजीव कुमार सिन्हा ने नशा कारोबार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर जोर देते हुए पुलिस प्रशासन से कहा कि केवल छोटे पैडलर्स तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे नेटवर्क और मुख्य तस्करों तक पहुंचकर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि नशा समाज और विशेषकर युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रभावी जांच, साक्ष्य संकलन और त्वरित कार्रवाई कर ही जिले को नशा मुक्त बनाया जा सकता है।
सामाजिक न्याय के बिना प्रगति संभव नहीं : डीसी
उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा कि “हम भारत के लोग” की भावना के अनुरूप सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। जब तक समाज को सामाजिक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक किसी भी क्षेत्र में वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि बहु-हितधारक परामर्श एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां प्रशासन, न्यायपालिका, पुलिस और सामाजिक संगठन मिलकर समस्याओं पर साझा रणनीति बना सकते हैं। स्थानीय सामाजिक संरचना और परंपराओं को ध्यान में रखकर कार्ययोजना बनाना आवश्यक है।
एनडीपीएस एक्ट में कड़े दंड का प्रावधान : एडीजे
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरंजन सिंह ने एनडीपीएस एक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए इस कानून में कड़े दंड का प्रावधान है। गंभीर मामलों में अधिकतम सजा तक का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि तलाशी और जांच प्रक्रिया में नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा की गई है तथा कानून के दुरुपयोग पर अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है।
सामाजिक कुरीतियां बन रहीं बाल विवाह का कारण : डीएसपी
डीएसपी रणवीर सिंह ने कहा कि सामाजिक परंपराएं और रूढ़ियां आज भी बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं का कारण बन रही हैं। कई बार प्रेम प्रसंग और पारिवारिक दबाव भी बाल विवाह को जन्म देते हैं। उन्होंने सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।
हितधारकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर
कार्यशाला में न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और अन्य हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी की। सभी ने आपसी समन्वय, जागरूकता अभियान और सख्त कानूनी कार्रवाई के माध्यम से सिमडेगा को नशा मुक्त और बाल विवाह मुक्त बनाने पर सहमति जताई।
मौके पर स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष रमेश कुमार श्रीवास्तव, बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद, चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव, छोटानागपुर कल्याण निकेतन की सचिव प्रियंका सिन्हा सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में सीजेएम निताशा बारला, न्यायिक दंडाधिकारी सुभाष बाड़ा, पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता एवं पीएलवी उपस्थित थे।
















