दुर्घटना मामलों में त्वरित सूचना और सघन जांच जरूरी, गुड सेमेरिटन की भूमिका अहम: पीडीजे

दुर्घटना मामलों में त्वरित सूचना और सघन जांच जरूरी, गुड सेमेरिटन की भूमिका अहम: पीडीजे

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शंभू कुमार सिंह

सिमडेगा : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्राधिकार अध्यक्ष सह प्रधान जिला जज राजीव कुमार सिन्हा, एडीजे नरंजन सिंह, बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद एवं चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान जिला जज राजीव कुमार सिन्हा ने सड़क दुर्घटना मामलों में त्वरित कार्रवाई, पारदर्शिता और विभागों के समन्वय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना की सूचना तत्काल न्यायालय तक पहुंचनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके। साथ ही परिवहन विभाग को बीमा जांच के लिए सघन वाहन जांच अभियान चलाने और अनधिकृत नेम प्लेट पर सख्ती बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने ‘गुड सेमेरिटन’ (घायल की मदद करने वाले व्यक्ति) की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पीएलवी और पुलिस बल इस दिशा में अहम योगदान दे सकते हैं।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरंजन सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटना किसी के साथ भी हो सकती है, इसलिए सभी को यातायात नियमों के प्रति जागरूक होना जरूरी है। उन्होंने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर वाहन मालिक के खिलाफ सख्त दंड प्रावधान की जानकारी दी।

चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने ‘गोल्डन आवर’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद का समय जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को पुलिस द्वारा गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जिससे लोग निसंकोच मदद के लिए आगे आएं।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद ने बताया कि हिट एंड रन मामलों में मृत्यु पर 2 लाख रुपये और घायल होने पर 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि एमएसीटी पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जिला परिवहन पदाधिकारी संजय कुमार बाखला ने ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता पर जोर देते हुए बताया कि 16 वर्ष की आयु में बिना गियर वाले और 18 वर्ष की आयु में गियर वाले वाहन चलाने के लिए वैध लाइसेंस आवश्यक है।

अधिवक्ता शमीम अख्तर ने दुर्घटनाओं में खराब लाइट और अज्ञात वाहनों की भूमिका पर चिंता जताई तथा वाहनों में नेम प्लेट लगाने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग की। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुभाष बारा ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के प्रावधानों की जानकारी दी, जबकि पीएलए अध्यक्ष रमेश कुमार श्रीवास्तव ने मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम के अंत में खुली चर्चा आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्न और सुझाव रखे। सहायक एलएडीसीएस सुकोमल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर अधिवक्ता, पुलिस अधिकारी और पारा लीगल वॉलेंटियर्स बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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