Car damaged by E20 petrol: Consumer Commission orders Maruti Suzuki to provide a new vehicle or pay ₹20.50 lakh.

E20 पेट्रोल से खराब हुई कार, उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुजुकी को दिया नई गाड़ी या 20.50 लाख रुपये देने का आदेश

Car damaged by E20 petrol: Consumer Commission orders Maruti Suzuki to provide a new vehicle or pay ₹20.50 lakh.
Car damaged by E20 petrol: Consumer Commission orders Maruti Suzuki to provide a new vehicle or pay ₹20.50 lakh.

रायपुर: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक अहम उपभोक्ता फैसला सामने आया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने E20 पेट्रोल से जुड़ी एक शिकायत पर सुनवाई करते हुए कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी को ग्राहक को नई कार उपलब्ध कराने या 20 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

मामला रायपुर निवासी चिकित्सक डॉ. प्रेमराज देब्ता से जुड़ा है। उन्होंने जून 2024 में एक नेक्सा डीलरशिप से मारुति सुजुकी की कार खरीदी थी। कुछ समय बाद ही वाहन में तकनीकी दिक्कतें आने लगीं और कार बार-बार चलते-चलते बंद होने लगी। शिकायत के बाद वाहन को सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां ईंधन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए।

जांच में सामने आया एथेनॉल का मामला

लगातार परेशानी के बाद वाहन मालिक ने ईंधन की सरकारी प्रयोगशाला में जांच कराई। जांच रिपोर्ट में पेट्रोल टैंक में जमा सफेद पदार्थ को एथेनॉल से संबंधित अवशेष बताया गया। इसके बाद डॉ. देब्ता ने डीलर और कंपनी से संपर्क किया, लेकिन उनकी शिकायत का समाधान नहीं हुआ।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि वाहन खरीदते समय उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि उनकी कार का इंजन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है। उनका कहना था कि यदि वाहन नए मिश्रित ईंधन के अनुरूप नहीं था तो कंपनी और डीलरशिप की जिम्मेदारी थी कि ग्राहक को पहले से इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाती।

कंपनी ने खराब ईंधन को बताया वजह

सुनवाई के दौरान डीलरशिप और कंपनी की ओर से दलील दी गई कि वाहन में आई खराबी खराब गुणवत्ता वाले ईंधन के कारण हुई और यह वारंटी के दायरे में नहीं आता। कंपनी की ओर से एक निजी लैब की रिपोर्ट भी पेश की गई, जिसमें ईंधन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और तकनीकी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद माना कि संबंधित वाहन E20 ईंधन के लिए उपयुक्त नहीं था और ग्राहक को इस संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।

RKDF
Adv

उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) करार देते हुए मारुति सुजुकी को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की पुरानी कार वापस लेकर उसी मॉडल की E20-अनुकूल नई कार उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

आयोग ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित अवधि में नई कार उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो कंपनी को वाहन की कीमत, आरटीओ शुल्क और बीमा प्रीमियम सहित 20.50 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये भी देने होंगे।

E20 पर फिर छिड़ी बहस

रायपुर उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। फैसले के बाद वाहन मालिकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि वाहन खरीदते समय E20 अनुकूलता की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यह मामला भविष्य में उपभोक्ता अधिकारों और ऑटोमोबाइल कंपनियों की जवाबदेही से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now