रिम्स निदेशक की बर्खास्तगी और भ्रष्टाचार के आरोप: झारखंड में सियासी घमासान
रिम्स निदेशक की बर्खास्तगी और भ्रष्टाचार के आरोप: झारखंड में सियासी घमासान
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
झारखंड के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान, राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के निदेशक डॉ. राजकुमार की अचानक बर्खास्तगी ने राज्य में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने इस मामले को भ्रष्टाचार और सत्ताधारी गठबंधन की मनमानी से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों नेताओं ने इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।
रिम्स, गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए एकमात्र सहारा है। हाल ही में रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार को उनके पद से अचानक हटा दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया, न ही डॉ. राजकुमार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इस घटना ने BJP, को सरकार पर हमला करने का मौका दिया।
डॉ. राजकुमार, जो दलित समुदाय से आते हैं, को उनके 14 महीने के कार्यकाल में ईमानदारी और दक्षता के लिए जाना जाता है। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार के आरोप नहीं होने के बाद भी, उनकी बर्खास्तगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं ।
बाबूलाल मरांडी के आरोप
बाबूलाल मरांडी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस मामले पर सरकार को घेरा।
भ्रष्टाचार का विरोध करने की सजा:
मरांडी ने दावा किया कि रिम्स की शासी परिषद (जीबी) की हालिया बैठक में स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों ने डॉ. राजकुमार पर हेल्थमैप और मेडाल जैसी आउटसोर्सिंग कंपनियों को अनुचित भुगतान करने का दबाव बनाया।
महालेखाकार (एजी) की ऑडिट रिपोर्ट में इन कंपनियों के भुगतानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसमें फर्जी बिल और डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर जैसे मामले शामिल हैं।
डॉ. राजकुमार ने इस दबाव का विरोध किया और अनुचित भुगतान करने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उन्हें पद से हटाया गया।
दलित निदेशक का अपमान:
मरांडी ने आरोप लगाया कि दलित समुदाय से आने वाले इस प्रतिभावान अधिकारी को न केवल अपमानित किया गया, बल्कि बिना कारण बताए और बिना पक्ष रखने का मौका दिए उनकी बर्खास्तगी की गई।
उन्होंने इसे सामाजिक अन्याय और सत्ताधारी गठबंधन की दलित-विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया।
संगठित भ्रष्टाचार का गोरखधंधा:
मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार में विभिन्न “कामकाजी” विभागों (जैसे पथ निर्माण, भवन निर्माण, ग्रामीण विकास, और पेयजल विभाग) में ठेके-पट्टे और भुगतान की प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है।
विभागीय कमेटियां नाममात्र की हैं, और ठेकेदारों का चयन, कार्य आवंटन, और भुगतान सत्ताधारियों की मिलीभगत से सचिवों के मौखिक निर्देशों पर होता है।
इस भ्रष्टाचार से होने वाली कमाई का हिस्सा “ऊपर” तक जाता है, और जो अधिकारी इसका विरोध करते हैं, उन्हें डॉ. राजकुमार की तरह हटा दिया जाता है।
सीबीआई जांच की मांग:
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की, ताकि भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आए।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री में हिम्मत है, तो वे इस जांच का आदेश देकर जनता के सामने सच लाएं।
अमर कुमार बाउरी के आरोप
बेरमो में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने भी इस मामले को उठाया और स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
रिम्स में भ्रष्टाचार की आग:
बाउरी ने कहा कि रिम्स, जो गरीबों का इलाज करने वाला प्रमुख संस्थान है, आज भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है।
स्वास्थ्य मंत्री की दखलअंदाजी और दबाव के कारण यह संस्था भ्रष्टाचार की आग में झोंकी जा रही है।
डॉ. राजकुमार की बर्खास्तगी:
बाउरी ने आरोप लगाया कि डॉ. राजकुमार को बिना पूर्व सूचना, कारण, या जांच के पद से हटाया गया, जो यह दर्शाता है कि सरकार ईमानदार अधिकारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ काम नहीं करने देना चाहती।
उन्होंने कहा कि डॉ. राजकुमार के 14 महीने के कार्यकाल को ईमानदारी का उदाहरण माना जाता था, और उनके खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं था।
हेल्थमैप और मेडाल की अनियमितताएं:
बाउरी ने बताया कि एजी की ऑडिट रिपोर्ट में हेल्थमैप और मेडाल जैसी कंपनियों के भुगतानों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जैसे फर्जी बिल, डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर, और अन्य वित्तीय गड़बड़ियां।
इसके बावजूद, स्वास्थ्य मंत्री इन कंपनियों के फर्जी बकायों के भुगतान के लिए डॉ. राजकुमार पर दबाव डाल रहे थे।
टेंडर में हेराफेरी:
बाउरी ने आरोप लगाया कि कैबिनेट से स्वीकृत एमआरआई मशीन के टेंडर को रद्द कर अपने पसंदीदा ठेकेदार को टेंडर देने के लिए भी निदेशक पर दबाव बनाया जा रहा था।
दलित विरोधी रवैया:
बाउरी ने कांग्रेस और सत्ताधारी गठबंधन पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान की दुहाई देने वाले कांग्रेसी नेता दलित निदेशक के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, जो उनकी कथनी और करनी में अंतर को दर्शाता है।
मांगें:
बाउरी ने निम्नलिखित मांगें रखीं:
रिम्स निदेशक की बर्खास्तगी की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच।
हेल्थमैप और मेडाल के वित्तीय लेनदेन की सीबीआई जांच।
रिम्स की सेंट्रल लैब के निर्माण में देरी की स्वतंत्र जांच।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल द्वारा इस मामले का विवरण जनता के सामने रखा जाए।
चेतावनी:
बाउरी ने चेतावनी दी कि यदि रिम्स जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को राजनीतिक दबाव में चलाया गया, तो इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ेगा।
सरकार का रुख
अब तक हेमंत सोरेन सरकार या स्वास्थ्य मंत्री की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। डॉ. राजकुमार की बर्खास्तगी के कारणों और प्रक्रिया पर सरकार की चुप्पी ने विपक्ष के आरोपों को और हवा दी है।
डॉ. राजकुमार की बर्खास्तगी ने झारखंड में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक दबाव, और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है। बाबूलाल मरांडी और अमर बाउरी ने इस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सीबीआई जांच की मांग की है। अब यह देखना होगा कि क्या सरकार इस मामले में पारदर्शी रुख अपनाती है या विपक्ष का दबाव और बढ़ता है।

















