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झारखंड हाईकोर्ट ने रांची पुलिस की ED जांच पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 9 फरवरी को

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची पुलिस की ED जांच पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 9 फरवरी को

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रांची: पेयजल विभाग के पूर्व क्लर्क संतोष कुमार द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाने के बाद उत्पन्न विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने ED को तत्काल फौरी राहत दी है। कोर्ट ने रांची पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR और चल रही जांच पर सुनवाई पूरी होने तक स्टे (रोक) लगा दी है। साथ ही ED ऑफिस की सुरक्षा CISF या BSF से करवाई जाए । हाइकोर्ट ने क्लर्क संतोष कुमार से भी जवाब मांगा है ।

हाईकोर्ट का रुख

16 जनवरी शुक्रवार को हुई सुनवाई में झारखंड हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए:रांची पुलिस की जांच पर तत्काल प्रभाव से स्टे लगा दिया।
ED कार्यालय की सुरक्षा अब CISF या BSF को सौंपी जाएगी।
राज्य सरकार को 7 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश।
अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को निर्धारित।

वैसे यह घटना पश्चिम बंगाल में ED-पुलिस टकराव की याद दिलाती है, जहां केंद्र और राज्य के बीच बार-बार ऐसे विवाद सामने आए हैं। फिलहाल कानूनी प्रक्रिया चल रही है और जांच रुकी हुई है।

मामले की शुरुआत

यह पूरा विवाद झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में हुए करीब 20-23 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा है। आरोपी संतोष कुमार (पूर्व कैशियर/क्लर्क) पहले से ही इस मामले में रांची पुलिस और ACB द्वारा जांच के घेरे में थे और जेल भी जा चुके हैं (वर्तमान में जमानत पर हैं)।ED इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है, जिसमें तत्कालीन मंत्री, सचिव और विभागीय इंजीनियरों की भूमिका भी सामने आई है।

12 जनवरी 2026: ED ने संतोष कुमार को पूछताछ के लिए बुलाया। संतोष ने आरोप लगाया कि ED के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम ने उन पर मारपीट की, सिर फोड़ा (6 टांके लगे), धमकियां दीं और जबरन कबूलनामा लिखवाने की कोशिश की।
उसी दिन: संतोष ने रांची के एयरपोर्ट थाना में FIR दर्ज कराई (केस नंबर 05/2026), जिसमें हत्या के प्रयास, मारपीट, आपराधिक धमकी आदि धाराएं लगाई गईं।
15 जनवरी 2026: रांची पुलिस की टीम (सदर DSP, सिटी DSP सहित) ED कार्यालय पहुंची। पुलिस ने लगभग 9 घंटे तक पूछताछ की, CCTV फुटेज खंगाला। इससे काफी तनाव पैदा हुआ और राजनीतिक बवाल मचा (बीजेपी ने राज्य सरकार पर केंद्र की जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया)।
ED की प्रतिक्रिया: ED ने इसे जांच में हस्तक्षेप बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। ED ने FIR रद्द करने, पुलिस जांच रोकने और वैकल्पिक रूप से CBI जांच की मांग की है।

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