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झारखण्ड में रामगढ़ में 6 दिन में आधे दर्जन गए , साल भर में 16 स्वर्ग पधारे उत्पात

झारखण्ड में रामगढ़ में 6 दिन में आधे दर्जन गए , साल भर में 16 स्वर्ग पधारे उत्पात

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झारखंड के रामगढ़ जिले में जंगली हाथियों का आतंक अब अपने चरम पर पहुँच गया है। पिछले एक सप्ताह के दौरान ही 6 से अधिक लोगों को हाथियों ने कुचल डाला है। जबकि दर्जनों लोग घायल हैं। पतरातू, मांडू, कुजू और घाटो प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल है।

अब तक जंगल से भटके इन हांथियो ने ग्रामीणों का जीवन दूभर कर दिया ही ।16-17 दिसंबर एक ही दिन में हांथियो के कुचलने से 4 लोगों की मौत। एक युवक सेल्फी लेने की कोशिश में हाथी के पैरों तले कुचला गया।
18 दिसंबर: 60 वर्षीय लोकनाथ मुंडा की मौत।
19-20 दिसंबर: पतरातू और भुरकुंडा के आसपास 2 और मौतें।

22 दिसंबर: रामगढ़-रांची-पटना NH-33 पर हाथियों का झुंड सामने आया, जिससे कई घंटे ट्रैफिक जाम रहा।

वन विभाग के अनुसार, करीब 40-45 हाथियों का एक बड़ा झुंड बोकारो-रामगढ़ सीमा के जंगलों से निकलकर ग्रामीण इलाकों में फैल गया है। कई बार झुंड बिखर जाता है, जिससे छोटे-छोटे ग्रुपों में हमले हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वे रातभर जागते हैं। कई जगहों पर लाउडस्पीकर से अलर्ट जारी किया जा रहा है। लोग फायरक्रैकर, लाल मिर्च और ड्रम बजाकर हाथियों को भगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर लग रही है।

वन विभाग की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) सक्रिय है। हमर हाथी’ ऐप के माध्यम से हाथियों की रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग की जा रही है। वहीं मृतकों के परिवारों को 25,000 रुपये तत्काल राहत और शेष मुआवजा देने का आश्वासन।
वन विभाग की ओर से दिया जा रहा है। वन विभाग ने ग्रामीणों को हांथियो से दूर रहने, घरों में रहने और हाथियों के नजदीक न जाने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है की यह इंसान-हाथी के संघर्ष का सबसे गंभीर दौर है। खनन, सड़क निर्माण और जंगलों के कटने से हाथियों के प्राकृतिक रास्ते बाधित हो गए हैं, जिससे वे गाँवों की ओर बढ़ रहे हैं।स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है।

वैसे वन विभाग के अनुसार, करीब 40 से 45 हाथियों का एक बड़ा झुंड रामगढ़-बोकारो सीमा के जंगलों से निकलकर पतरातू, मांडू, कुजू, घाटो और सरूबेड़ा प्रखंड के गाँवों में फैल गया है।
झुंड कई बार बिखर जाता है, जिससे छोटे-छोटे ग्रुपों में हमले हो रहे हैं।

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