बिहार में फर्जी आधार रैकेट का खुलासा, अब झारखंड में भी जांच की जरूरत; सीमावर्ती जिलों पर बढ़ी नजर
रांची। बिहार में फर्जी आधार कार्ड और दूसरे पहचान दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क के सामने आने के बाद अब झारखंड में भी इसकी संभावित पहुंच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर संथाल परगना के सीमावर्ती जिलों—साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा और जामताड़ा—को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ सकती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बिहार में जांच के दौरान सामने आए नेटवर्क में कथित तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इस मामले ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई है क्योंकि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल पहचान बनाने तक सीमित नहीं रहकर SIM कार्ड, बैंक खाते और KYC जैसी सेवाओं में किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
बिहार में 815 संदिग्ध मामलों की पहचान
बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने राज्य में फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज तैयार किए जाने से जुड़े 815 संदिग्ध मामलों को चिह्नित किया है। इनमें से 416 मामलों का सत्यापन कराया गया। जांच के बाद राज्य के 23 जिलों में 44 प्राथमिकी दर्ज किए जाने और 71 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
जांच में कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों, उनके डिजिटल लिंक और दस्तावेजों के संभावित इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।

क्या झारखंड तक पहुंचा नेटवर्क?
बिहार में मामला सामने आने के बाद झारखंड के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि कहीं इसी तरह का नेटवर्क राज्य में भी सक्रिय तो नहीं है। दोनों राज्यों की सीमा से लगे इलाकों में लोगों की आवाजाही और दस्तावेजों के इस्तेमाल को देखते हुए जांच एजेंसियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है।
विशेष रूप से साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा जैसे जिलों में यदि फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि दस्तावेज कहां तैयार हुए, किसके नाम पर बने और उनका इस्तेमाल किन सरकारी अथवा वित्तीय सेवाओं में किया गया।
हालांकि, बिहार में पकड़े गए नेटवर्क का झारखंड में सक्रिय होने की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल जांच का विषय ही माना जाना चाहिए।
फर्जी दस्तावेजों से किन सेवाओं पर खतरा?
जांच एजेंसियों को आशंका है कि फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कई तरह की सेवाओं में किया जा सकता है। इनमें—
– मोबाइल SIM लेने के लिए KYC
– बैंक खाते खोलना
– दूसरे व्यक्ति के नाम पर वित्तीय लेन-देन
– सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की कोशिश
– मतदाता पहचान से संबंधित प्रक्रियाएं
– अन्य पहचान आधारित सेवाएं
शामिल हो सकती हैं।
हालांकि किसी व्यक्ति के पास फर्जी दस्तावेज मिलने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसने अवैध तरीके से नागरिकता हासिल की है। प्रत्येक मामले में दस्तावेजों की उत्पत्ति और इस्तेमाल की अलग से जांच जरूरी होगी।
जमशेदपुर में तीन अफगानी नागरिकों का मामला भी चर्चा में
इसी बीच जमशेदपुर में तीन अफगानी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने से जुड़ा मामला भी चर्चा में है। चुनाव से संबंधित प्रक्रिया में इनके नाम सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के दौरान किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था।
इन दस्तावेजों की प्रकृति और उनकी सत्यता की जानकारी सामने आने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला फर्जी दस्तावेजों के किसी नेटवर्क से जुड़ा है या नहीं।
UIDAI की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह
फर्जी आधार से जुड़े मामलों के बीच लोगों के लिए सबसे जरूरी सावधानी यह है कि आधार से संबंधित कोई भी काम अधिकृत केंद्र से ही कराया जाए। अनधिकृत वेबसाइट, ऐप या किसी व्यक्ति के माध्यम से आधार में बदलाव अथवा नया दस्तावेज तैयार कराने से बचना चाहिए।
आधार से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग रोकने के लिए लोग अपने आधार की स्थिति और प्रमाणीकरण गतिविधियों पर भी नजर रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आधार की बायोमेट्रिक जानकारी को लॉक करने की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
बिहार की जांच से झारखंड को मिल सकता है सुराग
बिहार में सामने आए नेटवर्क की जांच यदि आगे बढ़ती है और उसके डिजिटल या दस्तावेजी लिंक दूसरे राज्यों तक पाए जाते हैं, तो झारखंड भी जांच के दायरे में आ सकता है। ऐसी स्थिति में बिहार और झारखंड की पुलिस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण होगा।
हालांकि झारखंड में इस नेटवर्क के जरिए फर्जी आधार बनाकर किसी बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से लोगों को बसाने या घुसपैठ कराने की पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

















