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हजारीबाग जेल ब्रेक: फरार तीन उम्रकैद कैदी महाराष्ट्र के सोलापुर से गिरफ्तार, कानून के लंबे हाथ ने 11 दिनों में पकड़ा

हजारीबाग जेल ब्रेक: फरार तीन उम्रकैद कैदी महाराष्ट्र के सोलापुर से गिरफ्तार, कानून के लंबे हाथ ने 11 दिनों में पकड़ा

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हजारीबाग जेपी सेंट्रल जेल से पिछले साल  31 दिसंबर 2025 को फरार तीन POCSO दोषी कैदियों को पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर से गिरफ्तार किया।

SIT की त्वरित कार्रवाई से कानून की जीत!

हजारीबाग पुलिस की बड़ी सफलता: जेल से फरार तीन खूंखार कैदी महाराष्ट्र से दबोचे गए

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हजारीबाग, 11 जनवरी : झारखंड की सबसे हाई-सिक्योरिटी जेल मानी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारागार (जेपी सेंट्रल जेल) से नए साल की पूर्व संध्या पर फरार हुए तीन आजीवन कारावास भुगत रहे खतरनाक कैदियों को पुलिस ने महज 11 दिनों के भीतर पकड़ लिया है।

घटना का पूरा विवरण
31 दिसंबर 2025 की रात करीब 1:30 से 2:00 बजे के बीच तीनों कैदियों ने जेल के शौचालय की खिड़की की ग्रिल (रॉड) काटी। इसके बाद उन्होंने जेल में उपलब्ध बेडशीट और चादरों को जोड़कर मजबूत रस्सी बनाई और जेल की 21 फीट ऊंची दीवार को पार कर फरार हो गए। यह घटना जेल की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक थी, जिसके बाद कई जेल कर्मियों को निलंबित किया गया और जांच शुरू हुई।

गिरफ्तार कैदी और उनके अपराध

तीनों कैदी POCSO एक्ट (बच्चों के यौन शोषण से संबंधित गंभीर अपराध) में दोष सिद्ध होकर उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

नाम हैं: देवा भुईयाँ उर्फ देव कुमार भुईयाँ (धनबाद का कुख्यात अपराधी, जो पहले 2021 में धनबाद जेल से भी फरार हो चुका था)
राहुल रजवार (या राहुल पंजवार)
जितेन्द्र रवानी

देवा भुईयाँ इस फरारी के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना को चुनौती मानते हुए हजारीबाग पुलिस ने तुरंत तीन विशेष SIT टीमों का गठन किया। तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल ट्रेलिंग और लगातार छापेमारी के जरिए कैदियों की लोकेशन ट्रैक की गई।
ट्रैकिंग रूट: झारखंड → बिहार → पश्चिम बंगाल → उत्तर प्रदेश → महाराष्ट्र।
अंत में, सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र स्थित कोरटी ईंट-भट्ठा से तीनों को गोपनीय ऑपरेशन में दबोचा गया।

स्थानीय महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें वापस हजारीबाग लाया गया और जेल में बंद कर दिया गया।

पुलिस का संदेश साफ
अपराधी कितनी भी दूर भाग जाएं, कानून के लंबे हाथ उन तक जरूर पहुंचते हैं। हजारीबाग पुलिस ने इससे पहले भी ओपन जेल से फरार बांग्लादेशी नागरिकों को 24 घंटे में पकड़कर अपनी कार्यकुशलता साबित की थी।

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