30 साल से काम कर रहे CGST के दो कैजुअल कर्मियों को नहीं मिली नियमित नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
कोर्ट ने कहा- ग्रुप-डी पद अब अस्तित्व में नहीं, ग्रुप-सी में नियमितीकरण के लिए मैट्रिक पास होना अनिवार्य

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्रीय जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क (CGST & Central Excise) विभाग में करीब 30 वर्षों से कार्यरत दो पार्ट-टाइम कैजुअल मजदूरों को नियमित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि छठे वेतन आयोग के बाद ग्रुप-डी पद समाप्त होकर ग्रुप-सी में विलय हो चुके हैं और ग्रुप-सी में नियमित नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक पास होना आवश्यक है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने W.P.(S) No. 4434 of 2026 में सुनाया।
याचिकाकर्ता श्यामा नंद तिवारी और प्रकाश शर्मा वर्ष 1995 और 1999 से CGST विभाग में पार्ट-टाइम कैजुअल लेबर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने दावा किया था कि तीन दशक से लगातार सेवा देने के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया गया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि CBIC Part-Time Casual Labourers (Regularization) Scheme, 2020 में ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं है, इसलिए उनका नियमितीकरण किया जाना चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि छठे वेतन आयोग के बाद ग्रुप-डी पद समाप्त हो चुके हैं। अब नियमितीकरण केवल ग्रुप-सी पद पर ही संभव है, जिसके लिए मैट्रिक पास होना अनिवार्य है। दोनों याचिकाकर्ता केवल आठवीं और नौवीं पास हैं, इसलिए वे पात्र नहीं हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के बिना किसी कर्मचारी का नियमितीकरण नहीं किया जा सकता। ऐसी नियुक्ति को बाद में वैध नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने तथ्यों और कानून पर सही विचार किया है और उसके आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
ग्रुप-डी पद अब अस्तित्व में नहीं हैं।
ग्रुप-सी में नियमितीकरण के लिए मैट्रिक पास होना अनिवार्य है।
आवश्यक शैक्षणिक योग्यता का अभाव नियुक्ति की मूल पात्रता को प्रभावित करता है।
केवल लंबे समय तक सेवा देने से नियमितीकरण का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता।
फैसले का असर
यह निर्णय उन कैजुअल एवं पार्ट-टाइम कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेवा की अवधि चाहे कितनी भी लंबी हो, यदि कर्मचारी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करता तो उसे नियमित नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।















