चंद्रयान-5 मिशन के लिए ISRO और JAXA के बीच ऐतिहासिक समझौता, PM मोदी ने टोक्यो में की घोषणा
टोक्यो: भारत और जापान ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने चंद्रयान-5 मिशन, जिसे लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) मिशन के नाम से भी जाना जाता है, के लिए सहयोग करने का समझौता किया है। इस ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 को टोक्यो में 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा के साथ संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में की।
चंद्रयान-5: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की खोज में नया कदम
चंद्रयान-5 मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के स्थायी रूप से छायादार क्षेत्रों (Permanently Shadowed Regions) की गहन खोज पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर जल और जल-बर्फ की मौजूदगी का अध्ययन करना है, जो भविष्य में मानव उपस्थिति और संसाधन उपयोग के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यह मिशन भारत की चंद्रयान श्रृंखला का पांचवां चरण है और पहला ऐसा मिशन है, जिसमें JAXA के साथ साझेदारी की जा रही है।
मिशन की तकनीकी विशेषताएं
चंद्रयान-5 को 2027-28 में JAXA के H3-24L रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में ISRO द्वारा विकसित एक लैंडर और JAXA द्वारा निर्मित एक रोवर शामिल होगा। 6.5 टन वजनी पेलोड में 250 किलोग्राम का रोवर होगा, जो चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर से 10 गुना भारी है। यह रोवर जल विश्लेषक, स्पेक्ट्रोमीटर, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार और 1.5 मीटर ड्रिल जैसे उन्नत उपकरणों से लैस होगा। इसके अलावा, मिशन में ISRO, JAXA, NASA और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के वैज्ञानिक उपकरण शामिल होंगे, जो चंद्रमा की सतह का गहन विश्लेषण करेंगे।
PM मोदी का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को मानवता की प्रगति का प्रतीक बताते हुए कहा, “हम ISRO और JAXA के बीच चंद्रयान-5 मिशन के लिए सहयोग का स्वागत करते हैं। हमारा यह सक्रिय सहयोग पृथ्वी की सीमाओं को पार कर अंतरिक्ष में मानवता की प्रगति का प्रतीक बनेगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह साझेदारी न केवल अंतरिक्ष विज्ञान की सीमाओं को विस्तार देगी, बल्कि पृथ्वी पर जीवन को बेहतर बनाने में भी योगदान देगी।
भारत-जापान साझेदारी का व्यापक प्रभाव
पीएम मोदी ने जापानी अखबार ‘द योमिउरी शिम्बुन’ को दिए साक्षात्कार में कहा, “भारत की अंतरिक्ष यात्रा हमारे वैज्ञानिकों की दृढ़ता, मेहनत और नवाचार की कहानी है। चंद्रयान-3 की दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग से लेकर अंतरग्रहीय मिशनों तक, भारत ने यह साबित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं, बल्कि अगली सीमा है।” उन्होंने इस साझेदारी को भारत और जापान के उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाला बताया, जो नवाचार को प्रयोगशालाओं से लेकर वास्तविक अनुप्रयोगों तक ले जाएगा।
चंद्रयान-5 मिशन भारत की महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष योजनाओं का हिस्सा है, जिसमें 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) की लैंडिंग और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) का निर्माण शामिल है। चंद्रयान-4, जो 2027 में लॉन्च होने वाला है, चंद्रमा से नमूने वापस लाने का मिशन होगा। इसरो की यह रणनीति भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

















