आ गया झारखंड में मांसाहारी पौधा । खाता है कीट, पतंगा जानिए पूरी खबर
आ गया झारखंड में मांसाहारी पौधा । खाता है कीट, पतंगा जानिए पूरी खबर
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दलमा वन्यजीव अभयारण्य में मिले दुर्लभ मांसाहारी पौधे – एक बड़ी खुशखबरी!
झारखंड के जमशेदपुर के पास स्थित दलमा वन्यजीव अभयारण्य यूँ तो हाथियों के लिए सुरक्षित घर के रूप में बहुत मशहूर है। लेकिन अब यहां कुछ और खास चीजें मिली हैं, जो इस जगह को और भी महत्वपूर्ण बना रही हैं।वन विभाग और शोधकर्ताओं को बहुत खुशी हुई है क्योंकि यहां दुर्लभ मांसाहारी पौधे (Carnivorous Plants) मिले हैं।
ये ऐसे पौधे हैं जो कीड़े और छोटे-छोटे जीवों को पकड़कर खाते हैं। ये पौधे आम पौधों की तरह सिर्फ पानी और धूप से नहीं जीते, बल्कि कीड़ों से पोषण लेते हैं।
कहां-कहां मिले ये पौधे?
पटमदा क्षेत्र में ड्रोसेरा बर्मानी (Drosera burmannii) नाम का पौधा मिला है। इसे हिंदी में सनड्यू (Sundew) भी कहते हैं। इसके पत्तों पर चिपचिपा तरल होता है, जो कीड़ों को चिपका लेता है और फिर धीरे-धीरे उन्हें पचा लेता है।
बालीगुमा और कोंकादाशा जैसे इलाकों में यूटिकुलेरिया (Utricularia) नाम की प्रजाति पाई गई है।
इसे ब्लैडरवॉर्ट भी कहते हैं। ये ज्यादातर नम या पानी वाली जगहों में उगते हैं और छोटे-छोटे वैक्यूम जैसी थैली से कीड़े या सूक्ष्म जीवों को पकड़ लेते हैं।
ये पौधे क्यों खास हैं?
ये पौधे ऐसी मिट्टी में उगते हैं जहां नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्व बहुत कम होते हैं। इसलिए ये कीड़ों को खाकर अपना पोषण पूरा करते हैं। इनकी मौजूदगी से पता चलता है कि दलमा का जंगल बहुत स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से संतुलित है। ये पौधे जंगल में कीड़ों की संख्या को भी नियंत्रित रखते हैं, जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहता है।
क्या किया जा रहा है इनके संरक्षण के लिए?
फॉरेस्ट गार्ड और शोधकर्ता राजा घोष ने इन पौधों की खोज की और इसकी जानकारी तुरंत वरिष्ठ वन अधिकारियों को दी। अब वन विभाग ने फैसला किया है कि इन इलाकों में लोगों का आना-जाना नियंत्रित किया जाएगा। यानी आम लोगों या पर्यटकों को इन खास जगहों पर जाने से रोका जाएगा ताकि ये दुर्लभ पौधे सुरक्षित रहें और इनका प्राकृतिक विकास होता रहे।दलमा अब और भी महत्वपूर्ण क्यों?दलमा पहले से ही एशियाई हाथियों (Asian Elephants) के लिए सुरक्षित जगह है। यहां बहुत सारे जंगली जानवर रहते हैं। लेकिन अब मांसाहारी पौधों की खोज से यह जगह जैव-विविधता (Biodiversity) के नजरिए से और भी ज्यादा कीमती हो गई है।
यह खोज झारखंड के जंगलों के लिए गर्व की बात है और आगे के शोध के लिए भी नई उम्मीद जगाती है। दलमा अब सिर्फ हाथियों का घर नहीं, बल्कि दुर्लभ पौधों का भी खजाना बन गया है!
















