झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश: 11-13वीं JPSC के 342 सफल अभ्यर्थियों को अपील में प्रतिवादी बनाना होगा
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश: 11-13वीं JPSC के 342 सफल अभ्यर्थियों को अपील में प्रतिवादी बनाना होगा
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रांची, 21 जनवरी – झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं संयुक्त JPSC मुख्य परीक्षा के परिणाम रद्द करने की मांग वाली अपील में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया है कि परीक्षा में सफल घोषित 342 अभ्यर्थियों (जिन्हें पहले ही नियुक्ति पत्र जारी हो चुके हैं) को दो सप्ताह के अंदर प्रतिवादी (respondents) बनाएं।
यह निर्देश चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान दिया।
याचिकाकर्ता अयूब तिर्की और अन्य ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर की है। एकल पीठ ने अक्टूबर 2025 में याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें डिजिटल मूल्यांकन, क्षेत्रीय भाषा कॉपियों के परीक्षकों के अनुभव और अन्य अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केस का अंतिम फैसला इन 342 सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को सीधे प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्हें पक्षकार बनाना आवश्यक है ताकि प्राकृतिक न्याय सुनिश्चित हो।
जेपीएससी की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुभाशीष रसिक सोरेन और शोभा लकड़ा ने दलीलें पेश कीं।
मामला क्या है?
11-13वीं संयुक्त JPSC परीक्षा के तहत 342 पदों के लिए मुख्य परीक्षा का परिणाम मई 2025 में घोषित हुआ था।
याचिका में आरोप थे कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां हुईं, डिजिटल इवैल्यूएशन नियमों के खिलाफ था और क्षेत्रीय भाषा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कम अनुभव वाले परीक्षकों ने किया (जबकि नियमों में कम से कम 10 वर्ष अनुभव वाले परीक्षक अनिवार्य थे)।
एकल पीठ (जस्टिस दीपक रोशन) ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आपत्तियां समय पर नहीं उठाई गईं, मूल्यांकन में कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं पाई गई जो परिणाम रद्द करने योग्य हो, और सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार हुआ। याचिकाकर्ता परीक्षा में असफल होने के कारण प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति
मामला अब डिवीजन बेंच में लंबित है। 342 अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने के बाद अगली सुनवाई में गहराई से दलीलें सुनी जाएंगी। फिलहाल परिणाम रद्द नहीं हुआ है और नियुक्तियां प्रभावी हैं, लेकिन अपील का अंतिम फैसला इनकी स्थिति तय करेगा। जेपीएससी और अभ्यर्थियों के बीच यह लंबित विवाद झारखंड की सिविल सेवा भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।

















