झारखंड कांग्रेस में खुला विद्रोह: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उठाए सवाल, अनुशासनात्मक कार्यवाही की तैयारी !
झारखंड कांग्रेस में बवाल: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने PCC कमेटी पर सवाल उठाए, दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। बेटे प्रशांत किशोर ने इस्तीफा दिया, पार्टी अनुशासन कार्रवाई की तैयारी में।

आकाश सिंह
रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के हालिया विस्तार के बाद पार्टी में आंतरिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने लिखित पत्र में संगठन की कार्यशैली, दोहरे मापदंड और जंबो कमेटी के गठन पर तीखे सवाल उठाए हैं।
क्या कहा राधाकृष्ण किशोर ने?
राधाकृष्ण किशोर ने के. राजू को पत्र लिखकर प्रदेश कांग्रेस की स्थिति को “एक आंख में सुरमा और दूसरे में काजल” बताया। उन्होंने दो प्रमुख उदाहरण दिए:
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को अनुशासनहीनता के आरोप में तीन वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया, लेकिन उनकी तरफ किसी ने आवाज नहीं उठाई।
जिन लोगों ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस और उसके नेतृत्व को कोसा, उन्हें ही महत्वपूर्ण पद (चुनाव प्रबंधन समिति सदस्य) दिए गए।
उन्होंने कहा, “एक को साधिए, झारखंड में सब सध जाएगा।” साथ ही नई 314 सदस्यों वाली जंबो कमेटी में जातीय संतुलन, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की भागीदारी पर भी सवाल उठाए और जातीय डेटा सार्वजनिक करने की मांग की।
बेटे का इस्तीफा
राधाकृष्ण किशोर के बेटे प्रशांत किशोर ने भी PCC में सचिव पद मिलने के बावजूद इस्तीफा दे दिया। इससे असंतोष की गहराई साफ झलकती है।पार्टी की प्रतिक्रियापार्टी आलाकमान इन बयानों और पत्र को अनुशासनहीनता मान रहा है। सूत्रों के अनुसार राधाकृष्ण किशोर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ मंत्री पद से हटाने पर भी गंभीर विचार चल रहा है।
जाहिर है की ये मामला PCC की नई कमेटियों (कार्यकारी समिति, राजनीतिक मामलों की समिति, चुनाव प्रबंधन समिति) के गठन के बाद सामने आया है, जिसमें कुल सैकड़ों पदों की घोषणा की गई थी।
राधाकृष्ण किशोर कांग्रेस में अपेक्षाकृत पीसीसी में नए चेहरे को लेकर सवाल उठाया है। वे झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। महागठबंधन सरकार में कांग्रेस की स्थिति और आगामी रणनीतियों को देखते हुए यह आंतरिक कलह पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।अभी हाईकमान का अंतिम फैसला आना बाकी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई हो सकती है।


















