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झारखंड में पेसा नियमावली 2025 अधिसूचित:  लेकिन मूल ड्राफ्ट पर पूर्व पंचायती राज्य निदेशक निशा उरांव ने उठाये सवाल

झारखंड में पेसा नियमावली 2025 अधिसूचित:  लेकिन मूल ड्राफ्ट पर पूर्व पंचायती राज्य निदेशक निशा उरांव ने उठाये सवाल

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रांची, 03 जनवरी 2026: झारखंड सरकार ने नए साल की शुरुआत में आदिवासी समुदायों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम 1996 (पेसा) की नियमावली 2025 को अधिसूचित कर दिया है। 23 दिसंबर 2025 को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जनवरी 2026 में इसकी अधिसूचना जारी हुई। इससे राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को जल-जंगल-जमीन, लघु खनिज, सांस्कृतिक परंपराओं और विकास योजनाओं पर निर्णायक अधिकार मिलेंगे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे “जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा और ग्राम स्वराज” की दिशा में बड़ा तोहफा बताया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “यह नियमावली हमारे संसाधनों पर स्थानीय निर्णय की गारंटी देती है और आदिवासी समाज की परंपराओं को मजबूत करेगी।”

विवाद:

मूल ड्राफ्ट में बदलाव पर पूर्व निदेशक निशा उरांव की चिंता

अधिसूचना के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया है। 2008 बैच की आईआरएस अधिकारी नेशा उरांव (पूर्व पंचायती राज निदेशक), जिन्होंने 2023 में नियमावली का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार किया था, ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि नई नियमावली उनके कार्यकाल के जुलाई 2023 ड्राफ्ट और मार्च 2024 में विधि विभाग द्वारा अनुमोदित संस्करण से अलग है।

उन्होंने लिखा: “झारखंड में पेसा नियमावली आज जारी हो गई है। … इसमें कई संशोधन हुए हैं। इसका मैं विस्तार से विश्लेषण करूंगी।”निशा उरांव ने पहले भी कुछ समूहों पर आरोप लगाया था कि वे निजी एजेंडे से सरना धर्म और पारंपरिक आदिवासी परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कविता की पंक्ति “लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में…” उद्धृत कर पूरे राज्य की जवाबदेही पर सवाल उठाया था। निशा जल्द विस्तृत विश्लेषण करने और सच सामने लाने का दावा कर रही है।

 

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